मेरी कहानी

मेरी कहानी: 6 साल बाद अचानक उन्होंने लिखा की तुम हमेशा मेरे ख्यालों में रहती हो और मैं तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं.

तर्कसंगत

October 17, 2017

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हमारी पहली मुलाकात तब हुई जब मैं सिमबायोसिस में लॉ की पढ़ाई कर रही थी औऱ वो एकेडमी में एक कैडेट थे. इस कहानी की शुरुआत कुछ मजेदार तरीके से हुई थी. मैं और मेरी दोस्त हर विकेंड पर एनडीए के कैंटीन में खाना खाने जाया करते थे क्योंकि वहां का खाना बहुत सस्ता था. कुछ यूं ही हमारी दोस्ती हो गयी लेकिन जल्दी ही वो आइएमए देहरादून चले गये फिर अधिकारी बनने पर लगतार अलग-अलग जगहों पर उसकी पोस्टींग होती रही. शायद आप यकीन न करें लेकिन इस दौरान हम दोनों बस खत के माध्यम से एक दूसरे के संपर्क में रहे. ये बात तकरीबन होगी 2002 की जब मोबाइल का इस्तेमाल अपने बाल्य अवस्था में था इसलिए हम दोनों आपस में खत के जरिये ही आपबीती, दुखसुख साझा किया करते थे. वो सारे खत बहुत ही मासुम लोकिन कामल के थे क्योंकि उनके जरिये मैं ये जान पायी को वो सरलता और सादगी से भरे व्यक्ति है.

पता ही नहीं चला कब 6 साल यूं ही बातो बातों में निकल गये और एक दिन अचानक उन्होंने मुझे मैसेज भेजा जिसमें लिखा था की तुम हमेशा मेरे ख्यालों में रहती हो और मैं तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं. वो मैसेज बहुत ही साधारण था जिसमें बढ़ाचढ़ा कर प्यार का इजहार नहीं था लेकिन उसमें प्यार और स्थिरता थी.

शादी के बाद मैं उनके साथ भटींडा आ गयी जहां मैं भी घर बैठे वकालत कर रही थी. वो ढ़ाई साल मेरी जिंदगी के सबसे खूबसुरत औऱ खास लम्हे थे लेकिन एक प्रोफेशनल होने के नाते मैं ये समझती थी की हर दूसरे साल मैं उसके साथ जगह नहीं बदल सकती क्योंकि कई जगह जहां पर उनकी पोस्टींग होती थी वहां मेरे लिए कोइ काम नहीं होता था. हालांकि शिक्षक बनने की गुंजाइश होती थी लेकिन मैने शिक्षक बनने के लिए लॉ की पढ़ाई नहीं की.

हमने मिलकर ये फैसला किया की मैं अपने करियर को उछाल देने के लिए मुंबई जाउंगी और वो अपनी पोस्टींग पर. ये वाकई में मुश्किल भरा निर्णय था लेकिन कई मायनों में ये जरुरी भी था. अब हमारे प्रेम पत्र की जगह व्हाट्स एप ने ले ली.

अब हम एक दूसरे से 4 महीने में एक ही बार मिल पाते हैं लेकिन वो 15 दिन जब हम साथ होते हैं वही हमारे लिए सबकुछ है. हमारी 3 साल की एक बेटी भी है. हमें जॉब में अक्सर बोनस और छुट्टीयों के लेकर शिकायतें रहती है लेकिन फौज में दशक बीत जाते हैं जब आपकी पोजिशन और सैलेरी भी नहीं बढ़ती है. फिलहाल वो विमानन विभाग में हैं लेकिन एक वक्त था जब मैं सोते हुए आचनक नींद से उठ पड़ती थी और कहती की कभी उड़ान मत भरना. ऐसे भी दिन होते हैं जब मैं उन्हें बहुत याद करती हूं और उनके बिना जिना मुश्किल हो जाता है तब मेरी बेटी मुझे समझाकर करती है ये देश की सेवा के लिए है. वो एक अच्छे पती होने के साथ बहुत ही अच्छे पिता भी हैं. दूर रहने के बाद भी अपनी बेटी का होमवर्क करवाते हैं और फोन पर ही उससे कविताएं भी सुनते हैं जो उसे क्लास में पढ़ाया गया.

शहीद होने के बाद जो सम्मान एक जवान को दिया जाता है, हमें उसे हरेक दिन वैसी ही सम्मान देना चाहिए. मेरे पति ने अपने कई दोस्त कई कारणों से खो दिये. कई बार ऐसा भी होता है जब हम आपस में संपर्क भी नहीं कर पाते हैं क्योंकि वो ऐसी जगह होते हैं जहां नेटवर्क भी नहीं होता और जब कई दिनों के बाद उनका कॉल आता है और वो कहते हैं मैं ठीक हूं तो इससे ज्यादा राहत की कोई खबर नहीं होती. हलांकी उनका काम ही ऐसा है लेकिन ये हमारे लिए बहुत ही मुश्किल है. मुझे याद ही नहीं की कभी उन्होंने कोई शिकायत भी की, हरदिन जगने के साथ ही उनके चेहरे पे मुस्कान होती है क्योंकि वो अपने देश की सेवा में तत्पर हैं.

Story Source- Humans of Bombay


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