मेरी कहानी

मेरी कहानीः मैं भले ही बच्चा पैदा नहीं कर पाया लेकिन ज़िंदगी ने मुझे पिता बनने का मौक़ा दिया

तर्कसंगत

October 22, 2017

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मैं एक बेहद रूढ़िवादी परिवार में पैदा हुआ था जहां शादियां बचपन में ही तय हो जाती थीं. मुझे बाल विवाह की परंपरा में धकेल दिया गया था. मैं हमेशा से ये सोचता था कि लोगों को अपना जीवनसाथी चुनने की आज़ादी होनी चाहिए लेकिन मैं उस समय बहुत छोटा था और उस उम्र में आप अपने परिवार के सामने ये बातें नहीं पाते हैं. परिवार की परंपराओं का पालन करना ही पड़ता है.

जब मैं बड़ा हो रहा था तब मैंने देखा कि मेरे शरीर में इस तरह बदलाव नहीं हो रहे हैं जिस तरह मेरे बाकी दोस्तों के शरीर में हो रहे हैं. ये एक अच्छा संकेत नहीं था.

मेरे साथ के लड़कों का शरीर बदल रहा था लेकिन मेरा नहीं और ये बात मुझे बहुत निराश कर देती थी. मैंने कभी इस बारे में किसी से चर्चा नहीं की. न किसी दोस्त से न परिवार से. फिर एक समय आया जब डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद मुझे पता चला कि मैं हिजड़ा हूं (थर्ड जेंडर).

असली पहचान ने तोड़ दिया

मुझे पता चला कि मेरे शरीर में रिप्रोडक्टिव सिस्टम नहीं है. इस जानकारी से मैं बुरी तरह टूट गया था. मैं अपनी सही पहचान किसी को भी बताने से बहुत डरता था. मेरे परिवार में भी किसी को इस बारे में पता नहीं था

मैं 22 साल का हो गया था, शादी की बात चल रही थी और मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था. मैं उस लड़की की ज़िंदगी बर्बाद नहीं करना चाहता था लेकिन बचपन में हुई शादी की वजह से उसके परिवार के साथ हुए समझौते की वजह से हमें ये शादी करनी ही थी.

शादी के पहले कुछ सालों में मुझे हमेशा लगता था कि मैं अपनी जीवनसाथी को धोखा दे रहा हूं. मैं उसकी शारीरिक ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पाता था. मेरे शरीर में अंग ही नहीं था. असल में मुझे ऐसा लगता था कि मैं पुरुष के शरीर में क़ैद एक महिला हूं.

फिर एक दिन मैंने सबको सच बताने का फ़ैसला कर लिया और अपनी पत्नी और परिवार को मैंने पूरी बात बता दी. जल्द ही मेरे परिवार ने मुझे छोड़ दिया और समाज ने मेरा तिरस्कार कर दिया. मेंने अपनी पत्नी को किसी और से शादी करके ज़िंदगी फिर से शुरू करने की सलाह दी.

सब रास्ते बंद हो गए

हिजड़ा बन जाने का फ़ैसला बहुत तकलीफ़देह था. एक बार जब कोई हिजड़ा बन जाता है तो पुरानी ज़िंदगी के सभी रास्ते बंद हो जाते हैं, सभी संबंध ख़त्म हो जाते हैं. एक हिजड़े के लिए अपनी ज़िंदगी की नई सच्चाइयों को स्वीकार करना आसान नहीं होता. परिवार और पूरा समाज बहुत अलग तरह से व्यवहार करने लगता है.

अपनी पुरानी ज़िंदगी को पीछे छोड़कर मैं एक नई जगह भाग आया. मेरे मन में कोई विचार नहीं था ना ही कोई योजना थी.  मुझे नहीं पता था कि मैं जीवनयापन के लिए क्या करूंगा या शाम का खाना मुझे कैसे मिलेगा. लेकिन मुझे अपने बारे में और ज़्यादा पता चलने लगा. मैं अपने जैसे और लोगों से मिला. महिला बनने की मेरी चाह मुझे बिलकुल अलग जीवन में ले आई थी. एक ओर जहां मेरे परिवार ने जिसमें मैं जन्मा था मेरा तिरस्कार कर दिया था तो दूसरी ओर मुझे एक नया परिवार मिल रहा था.

मैं बच्चों के जन्म और शादियों में बधाइयां लेने लगा. नवविवाहितों को दुआएं देने के लिए मैंने नाचना शुरू कर दिया.

लौट आई पूर्व पत्नी

सबकुछ ठीक चल रहा था. मैं हिजड़ा बन कर नई ज़िंदगी को जीने लगा था और एक दिन मेरी पत्नी ने मेरे दरवाज़े पर दस्तक दी.  उसके साथ एक बेटा भी था. जिस पुरुष से उसने शादी की थी वो शराबी था और रोज़ उसे पीटता था. वो उसे कोई पैसा नहीं देता था और अन्य लड़कियों और शराब पर सबकुछ ख़र्च कर देता था.

उस समय तक मेरे पास ठीकठाक पैसा आ गया था. मैंने उसे वापस जाने के बजाय तलाक़ लेने की सलाह दी.

छह महीने बाद उसे तलाक़ मिल गया. मैंने उनके लिए नया फ्लैट खरीदकर दिया जहां वो अपने बच्चे के साथ रह सके. मैंने हर महीने उसे ख़र्च के लिए बीस हज़ार रुपए दिए और उसके बेटे को अच्छी से अच्छी शिक्षा दी. मैंने हमेशा उसे अपना ही बेटा समझा और उसके कॉलेज की फ़ीस भी दी. आज वो एमबीए है.

हाल ही में मैंने उसकी उस लड़की से शादी करवाई है जिसे वो प्यार करता है. शादी का पूरा ख़र्च मैंने उठाया है. आज वो तीनों एक अलग शहर में रहते हैं. मैं ख़ुश हूं कि मैंने असमान्य होने के बावजूद तीन सामान्य लोगों की ज़िंदगी में ख़ुशियां भरी हैं. मुझे लगता है कि ज़िंदगी इसी का नाम है.

मैं अपने पिता के लिए एक बहुत अच्छा बेटा नहीं बन पाया. न ही अपनी पत्नी के लिए एक बहुत अच्छा पति लेकिन मैं ये कह सकता हूं कि अपने बेटे के लिए मैं एक अच्छा पिता ज़रूर बन पाया. अपनी शारीरिक कमियों की वजह से मैं भले ही एक बच्चा पैदा न कर पाया हूं लेकिन जीवन ने मेरी पत्नी और उसके बेटे को मेरी ज़िंदगी में वापस लाकर मुझे पिता बनने का मौक़ा ज़रूर दिया है.

Courtsey:  Pray Bavishi | Humans of Amdavad


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