मेरी कहानी

मेरी कहानीः मेरे कपड़े ख़ून से लथपथ थे, उस गर्म दोपहरी में मैं अपना हाथ खोज रहा था

तर्कसंगत

October 28, 2017

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साल 1994 में मैं एक बड़े हादसे का शिकार हुआ था जिससे मेरी ज़िंदगी की दिशा ही बदल गई. मैं एक बस में यात्रा कर रहा था और अपना हाथ खिड़की पर रख दिया था.

बस ड्राइवर ने अचानक एक वाहन को ओवरटेक करने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर से पत्थरों के नुकीले स्लैब से भरा ट्रक आ रहा था.

एक नुकीला पत्थरा खिड़की पर रखे मेरे हाथ में आ घुसा और मेरे हाथ को अपने साथ ले गया.

मैंने महसूस किया कि मेरा दाहिना हाथ सुन्न हो गया है. फिर देखा की मेरा हाथ है ही नहीं. ख़ून बहुत तेज़ी से बह रहा था.

मैंने बस ड्राइवर से बस रोकने के लिए कहा. मेरे कपड़े ख़ून से लथपथ थे. उस गर्म दोपहर में मैं अपना हाथ खोज रहा था.

चंद मिनट बाद मुझे अपना हाथ दिखाई दिया. मैंने उसे उठा लिया और लेकर बस में आ गया. अन्य यात्रियों ने बस के पर्दे फाड़ दिए और रक्तस्त्राव रोकने के लिए मेरे हाथ पर कसकर बांध दिए.

मेरे हाथ को बर्फ़ में रख दिया गया ताकि उसे इंफेक्शन से बचाया जा सके. भाग्यवश बस में एक डॉक्टर भी थे जो मुझे नज़दीकी अस्पताल ले गए और वहां मुझे जीवनरक्षक इंजेक्शन दिए ताकि मेरे शरीर को भी इंफेक्शन से बचाया जा सके.

बाद में मुझे शहर के एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया. दुर्भाग्यवश मेरे हाथ में गैंगरीन हो गया था और उसे ऑपरेशन करके लगाया नहीं जा सकता था.

अब मुझे ये स्वीकार करना था कि बाकी जीवन मझे अपने दाहिने हाथ के बिना गुज़ारना है. लेकिन मैंने भगवान के इस फ़ैसले को बहुत सकारात्मकता से लिया.

मैंने जीवन के प्रति अपना नज़रिया बदल लिया और तब से मैं अपने जीवन के हर पल का आनंद लेने की कोशिश करता हूं.

आज मैं लिखता हूं, डांस करता हूं. गाड़ी भी चला लेता हूं. यहां तक की रोमांचक कार्य भी करता हूं.

मेरी एक इच्छा है कि मैं पूरी दुनिया में ख़ुद गाड़ी चलाकर घूमूं. और मैं किसी भी क़ीमत पर अपनी ये इच्छा पूरी करूंगा.

मैं लोगों को यही संदेश देना चाहूंगा कि कभी भी हार मत मानो.

मुकेश भट्ट

Story of the day: Mukesh Bhatt“In the year 1994, I met with a major accident which changed the course of my life. I…

Posted by Humans Of Amdavad on Wednesday, 25 October 2017

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