ख़बरें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेप पीड़िता के गर्भपात की अनुमति नहीं दी

तर्कसंगत

November 3, 2017

SHARES

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बलात्कार पीड़ित एक युवती को 24 सप्ताह का गर्भ गिराने की अनुमति नहीं दी है.

भारत में महिलाओं को बीस सप्ताह तक का गर्भ गिराने की ही अनुमित है.

अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा है कि नियमानुसार पीड़िता की मानसिक स्थिति और जीवन पर ख़तरे के मद्देनज़र 20 सप्ताह तक का गर्भ गिराने की ही अनुमति दी जा सकती है.

अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस पीड़िता के मामले में डॉक्टरों ने राय दी है कि गर्भ में बल रहे बच्चे और युवती के स्वास्थ्य को कोई ख़तरा नहीं है.

इस मामले में पीड़िता इलाहाबाद की नैनी जेल में बंद है. अदालत ने प्रदेश सरकार को युवती को पौष्टिक आहार मुहैया कराने के आदेश भी दिए हैं.

हाल ही में चंडीगढ़ में एक दस साल की बलात्कार पीड़ित बच्ची को भी गर्भ गिराने की अनुमति अदालत ने नहीं दी थी.

इस बच्ची ने अगस्त में एक बच्चे को जन्म दिया था.

गुरुवार को सहायक ज़िला और सत्र न्यायालय ने इस बच्ची का बलात्कार करने वाले दोनों मामाओं को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है.

इस बच्ची से बलात्कार की बात जुलाई में तब सामने आई थी जब उसने पेट में दर्द की शिकायत की थी.

बाद में जांच में बच्ची तीस महीने की गर्भवती पाई गई थी. अदालत ने चिकित्सीय आधार पर बच्ची के गर्भपात की इजाज़त नहीं दी थी.

भारत में गर्भपात को लेकर सख़्त क़ानून है. बीस सप्ताह से अधिक का गर्भ गिराने पर क़ानूनन प्रतिबंध है.

कई बार विशेष मामलों में जब गर्भवती की जान पर ख़तरा होता है या गर्भ में विकृति होती है तो अदालतें गर्भ गिराने की अनुमति दे देती हैं.


Contributors

Edited by :

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...