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दारोगा पिता हेड कांस्टेबल मां की बेटी का गैंगरेप, चक्कर लगवाती रही तीन थानों की पुलिस

तर्कसंगत

November 3, 2017

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक युवती के साथ गैंगरेप की घटना के बाद के घटनाक्रम ने राज्य की पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

भोपाल में जीआरपी थाने से महज सौ मीटर की दूरी पर 31 अक्तूबर की शाम कोचिंग से लौट रही छात्रा का गैंगरेप हुआ था.

अभियुक्त पीड़िता को खींचकर झाड़ी में ले गए थे. गैंगरेप के अलावा पीड़िता के साथ लूटपाट भी गई थी. उसका मोबाइल और बाकी सामान लूट लिया गया था.

गैंगरेप के बाद जब युवक मौके से फरार हो गए तो पीड़िता किसी तरह रात दस बजे आरपीएफ़ थाने पहुंची. लेकिन रेलवे पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज नहीं की.

अगली सुबह पीड़िता अपने पुलिसकर्मी मातापिता के साथ शहर के एमपी नगर थाने एफ़आईआर दर्ज करवाने गई लेकिन वहां भी एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक एमपी नगर थाने से पीड़िता अपने पिता के साथ घटनास्थल पर गई थी. यहां एक कांप्लेक्स के पास पीड़िता ने गैंगरेप करने वाले युवकों में से एक को देख लिया.

पीड़िता के पुलिसकर्मी पिता ने वहीं एक अभियुक्त को पकड़ लियाकाफ़ी मशक़्कत के बाद हबीबगंज थाने में एफ़आईआर दर्ज की गई है.

ऐसा पकड़ा अभियुक्त

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित अपने मातापिता के साथ घटनास्थल पर जा रही थी. रास्ते में वो मानसरोवर कांप्लेक्स के पास कुछ देर के लिए रुके थे. यहीं पीड़िता ने पास की झुग्गी में रहने वाले गोलू नाम के युवक को देख लिया. पीड़िता ने जब अपने माता पिता को बताया कि ये युवक भी गैंगरेप करने वाले युवकों में शामिल था तो उन्होंने उसे वहीं पकड़ लिया.

वे उसे लेकर हबीबगंज थाने गए जहां पुलिस पूछताछ में उसने बाकी तीन युवकों के नाम भी बता दिए. पुलिस ने अभियुक्तों से लड़की का मोबाइल फ़ोन और बाकी सामान भी बरामद कर लिया है.

बेहोश हो गई थी युवती

गैंगरेप के दौरान युवती बेहोश हो गई थी. होश आने पर वो घटनास्थल से कुछ ही दूर स्थित हबीबगंज आरपीएफ़ थाने पहुंची लेकिन पुलिस ने लड़की के बयान दर्ज करने के बावजूद एफ़आईआर दर्ज नहीं की. पीड़िता ने यहां से फ़ोन करके अपने परिजनों के घटना के बारे में जानकारी दी.

राजधानी भोपाल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली इस घटना का सबसे दुखद पहलू ये है कि पुलिस पीड़िता को एक से दूसरे थानों में टहलाती रही.

यही नहीं पुलिस की ओर से घटना के बाद अभियुक्तों को पकड़ने का कोई गंभीर प्रयास भी नहीं किया गया.

अब सवाल पूछा जा रहा है कि जब पुलिसकर्मियों की बेटी के साथ हुई घटना के मामले में ही इस तरह की गंभीर लापरवाही बरती गई है तो आम लोगों के साथ पुलिस किस तरह का व्यवहार करती होगी.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में किए जाने के आदेश दिए हैं.

 Source: Dainik Bhaskar

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