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जूते पॉलिश करके करोड़ों रुपए कमाने वाला इंजीनियर

तर्कसंगत

November 4, 2017

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कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता बल्कि विचार छोटे या बड़े होते हैं. जूता पॉलिश करने के जिस काम को अकसर लोग छोटा समझते हैं उसे ही मुंबई के एक युवा ने अपना बड़ा व्यवसाय बना लिया है.

मुंबई के संदीप गजकस आज द शू लॉंड्री चलाते हैं लेकिन जब उन्होंने इस काम की शुरुआत की थी तो उन्हें परिवार से ही विरोध का सामना करना पड़ा था.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ायर इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग करने वाले संदीप गजकस ने साल 2003 में अपने फ्लैट से द शू लॉंड्री की शुरुआत की थी.

संदीप गजकस दावा करते हैं कि ये भारत की पहली शू लॉंड्री सेवा है.

इंजीनियरिंग में डिग्री लेने के बाद संदीप विदेश जाकर नौकरी करना चाहते थे लेकिन 9/11 हमलों ने विदेशों में हालात मुश्किल कर दिए थे.

संदीप ने अपना इरादा बदल लिया और भारत में ही अपना काम शुरू करने का सोचा.

जब उन्होंने अपने परिवार में जूता पॉलिश का काम करने के बारे में बताया तो शुरू में उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा.

लेकिन सबकी बातों को अनसुना करके संदीप ने मात्र 12 हज़ार रुपए के साथ अपने फ्लैट से द शू लॉंड्री की शुरुआत की.

शुरुआत में संदीप ने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के जूते पॉलिश किए. धीरे-धीरे वो अपने काम को पॉलिश से आगे बढ़ाकर जूता ठीक करने तक ले गए.

एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, मैं पुराने जूतों को एकदम नया बनाने और उन्‍हें रिपेयर करने के इनो‍वेटिव तरीके ढूंढ़ रहा था‘.

मुंबई के अंधेरी इलाक़े से शुरू हुई संदीप गजकस की कंपनी के आज कई शहरों में दफ़्तर हैं. वो आज अपनी कंपनी की फ्रेंचायज़ी दूसरों को देते हैं और उनका टर्नओवर करोड़ों में है.


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