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ड्राइवर जिसने 28 साल से कभी होर्न नहीं बजाया

तर्कसंगत

November 10, 2017

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वो एक गर्म दोपहर थी. मैं जेपी नगर में ऑटो तलाश रही थी. आधे घंटे में कई ऑटो वाले मुझे ले जाने के लिए मना कर चुके थे. अंततः राजेश जी अपना ऑटो लेकर आए. उनके चेहरे पर एक मुस्कान थी.

बैंगलुरू बीते सालों में कितना बदल गया है. हम इसी बारे में बातें करने लगे. राजेश जी को यहां के मौसम से कोई परेशानी नहीं थी, हालांकि मैं ज़रूर अकसर इसे लेकर शिकायत करती हूं.

राजेश ने बताया कि इस समय बैंगलुरू की सबसे बड़ी समस्या ध्वनी प्रदूषण है.

अपनी टूटी फूटी अंग्रेज़ी में उन्होंने मुझे बताया कि बीते 28 सालों में उन्होंने अपने वाहन में होर्न का इस्तेमाल नहीं किया है. उन्होंने अंतिम बार अक्तूबर 1988  में होर्न बजाया था.

मैं उनकी इस उपलब्धि को लेकर आश्चर्यचकित थी.

पर्यावरण को बचाने में ये उनकी भूमिका थी जो उन्होंने बख़ूबी निभाई थी. जब काम करने के लिए विदेश में रह रहे थे तब उन्हें अहसास हुआ कि होर्न बजाना बिना बात के किसी व्यक्ति पर चिल्लाने जैसा है.

उन्होंने कहा, यहां जैसी ही बत्ती हरी होती है लोग होर्न बजाना शुरू कर देते हैं. लेकिन वो अगली बत्ती पर जाकर फिर अटक जाते हैं.

मैं राजेश की बात को समझ पा रही थी. बैंगलुरू के ट्रैफ़िक जाम बदनाम है. रेड लाइटों पर लगातार बजते होर्न इन्हें और पीड़ादायक बना देते हैं.

राजेश ने बताया कि वो अंधे लोगों और उनके विनम्र जीवन से बहुत प्रभावित हैं.  एक अंधे व्यक्ति के पास भले ही आंखें नहीं होती लेकिन वो दुनिया को बहुत ही सावधानी और परिपक्व कि नज़रिए से देखता है.

राजेश उम्मीद करते हैं कि ड्राइवर भी गाड़ी चलाते हुए चौकन्ने और सावधान रहें. ऐसा करने से होर्न बजाने की आदत कम होगी.

राजेश बैंगलुरू की सड़कों पर ऑटो चलाते हैं और उनके पास बताने के लिए बहुत अच्छी बातें हैं. अगर आप कभी उनके ऑटो में बैठे तो ज़रूर बातचीत करें.

राजेश कहते हैं कि वो कोई ज्ञान नहीं बांटना चाहते लेकिन यदि वो एक व्यक्ति के जीवन में भी बदलाव ला पाए तो ये काफ़ी होगा.

प्रेषक- पूजा प्रह्लाद सिंह

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