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पंडित नेहरू का पुत्री इंदिरा के नाम खत

तर्कसंगत

November 13, 2017

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1928 को नैनीताल की जेल से लिखे अपने पत्रों के जरिये जवाहर लाल नेहरू ने नन्हीं इंदिरा को कई बड़ी सीख दी. पत्रों की कुछ बातें आपके लिए.

प्यारी बेटी इंदिरा,

भारत विविधताओं से भरा देश है. यहां अलग-अलग रंग, रूप और क्षमताओं के लोग रहते हैं। भारत की विविधता ही तो हमारी पहचान है। इसलिये इन आधारों पर फर्क करना अमानवीय है.

डर से की गई बात बुरी होती है। पता है मजहब भी डर से आया. इसलिये मजहब के आधार पर दंगे फसाद गलत हैं.

प्यारी बेटी जो अपने को बदलकर आसपास की चीजों में मिला देते हैं, उनके लिए जिंदा रहना आसान हो जाता है.

हमें याद रखना चाहिए कि हम बंदरों और वनमानुषों के वंश के ही हैं. तुम अगर गौर से लोगों के स्वाभाव का आंकलन करोगी तो पाओगी आज भी शायद हम में से कई लोगों का स्वभाव बंदरों जैसा ही है.

अंग्रेज अपने को दुनिया में सबसे बढ़कर समझता है, फ्रांसीसी का भी यही ख्याल है कि मैं ही सबसे बड़ा हूं, जर्मन, अमेरिकन और दूसरी जातियां भी अपने को बड़ा समझती हैं.

हर देश के आदमी को ऐसा लगता है कि हम ही सबसे अच्छे और होशियार हैं और दूसरी जातियाों और धर्म के लोग घटिया हैं.

कितना अच्छा होता अगर, अगर दुनिया के सभी आदमी खुश और सुखी होते. हमें कोशिश करनी चाहिए कि सारी दुनिया ऐसी हो जाए जहां लोग चैन से रह सकें.

गली में लड़ते दो आदमियों को हम बेवकूफ और पागल समझते है. तुरंत हम पुलिस को बुलाते हैं. पुलिस उन्हें डंडे मारती है तो जब दो बड़े मुल्क आपस में लड़ने लगें और लाखों आदमियों को मार डालें तो वह कितनी बड़ी बेवकूफी और पागलपन है.

मिलकर काम करना अकेले काम करने से अच्छा है. सबकी भलाई के लिए एक साथ मिलकर काम करना सबसे अच्छी बात है.


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