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शर्मनाकः नसंबदी के बाद महिलाओं को बिस्तर के बजाए गंदी ज़मीन पर लिटाया

तर्कसंगत

November 14, 2017

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मध्य प्रदेश के मोरेना ज़िले में नसंबदी के बाद महिलाओं को अस्पताल में बिस्तर के बजाए बाहर ज़मीन पर ही लिटा दिया गया. नई दुनिया अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं को ज़हां लिटाया गया वो बहुत ही गंदी जगह थी.

महिलाओं के परिजनों की शिकायत करने के बाद ही उन्हें सर्जिकल वार्ड में बिस्तर पर लेटने दिया गया. अस्पताल प्रशासन को बताया गया कि जिस जगह पर महिलाओं को लिटाया गया था वहां से संक्रमण का ख़तरा है.

नसंबदी ऑपरेशन के बाद मरीज़ों का आराम करना ज़रूरी होता है. लेकिन मोरेना ज़िला अस्पताल में नसबंदी के बाद महिलाओं के आराम करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी.

महिलाओं के परिजनों को बताया गया है कि व्यवसथा इसलिए नहीं की गई थी क्योंकि महिलाओं को ऑपरेशन के कुछ देर बाद अपने घर लौट जाना था.

नसबंदी के दौरान बदइंतेज़ामी का ये पहला मामला नहीं है. साल 2014 में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नसबंदी ऑपरेशन के दौरान हुई गड़बड़ी से 18 लोगों की मौत हो गई थी. इनमें 13 महिलाएं थीं.

वहीं ओडीशा में नसबंदी के दौरान साइकिल में हवा भरने वाले पंप के इस्तेमाल का मामला सामने आया था. दरअसल एक डॉक्टर ने 56 महिलाओं की नसबंदी में साइकिल पंप का इस्तेमाल किया था.

इन घोर लापरवाहियों की एक वजह ये भी है कि नसबंदी कराने वाले लोग अकसर बेहद ग़रीब परिवारों से होते हैं जो प्रोत्साहन राशि के लालच में नसबंदी करा लेते हैं.

सरकार ने सुरक्षित नसबंदी के लिए कई मानक और नियम बनाए हैं, लेकिन नसबंदी कराने के बड़े लक्ष्य के चलते ऑपरेशन में गड़बड़ियां होती हैं और नतीजा मौतों के रूप में सामने आता है.

नसबंदी के दौरान ग़लत ऑपरेशन से हुई मौतों की बात करें तो 2009 से 2012 के बीच 700 से भी अधिक मौतें हुईं. ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ने के 356 मामले सामने आए.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ भारत में 2013-14 के दौरान 40 लाख नसबंदियां की गई. पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा एक लाख से भी कम रहा.


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