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भिखारी मुक्त होगा हैदराबाद, पहचान बताने वालों को मिलेगा 500 का इनाम

तर्कसंगत

November 15, 2017

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आईटी सिटी हैदराबाद को भिखारी मुक्त बनाने के लिए ऐसा लग रहा है युद्धस्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. हैदराबाद को इसी महीने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की मेहमाननवाजी करनी है और इस बीच मानों शहर के भिखारियों की शामत आ गई है. अब तो भिखारियों का पता बताने के लिए ईनाम तक का ऐलान कर दिया गया है.

हैदराबाद के प्रिज़न डिपार्टमेंट यानी कारागार विभाग ने भिखारियों की पहचान करने वालों को 500 रुपये का इनाम देने की घोषणा की है. शहर को भिखारी मुक्त बनाने में जुटे प्रशासन और पुलिस विभाग ने भिखारियों को हैदराबाद से हटाने के लिए ये नया तरीका ईजाद किया है.

राज्य सुधार प्रशासन संस्थान के उप प्राचार्य एम संपत ने का कहना है कि शहर के नागरिक भीख मांग रहे किसी भी व्यक्ति के बारे में कारागार नियंत्रण कक्ष को सूचित कर सकते हैं. 25 दिसंबर से कारावास विभाग में भिक्षुकों की पहचान करने वाले और इस बारे में अधिकारियों को सूचित करने वाले को 500 रुपये का इनाम दिया जाएगा.

अधिकारी इसे ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं और दुनिया भर में मिसाल कायम करने का दम भर रहे हैं. लेकिन क्या यही हकीकत है क्योंकि कुछ लोगों का तो ये भी कहना है कि भिखारियों को बदलना ही था तो उनकी मदद करते, उन्हें अस्थायी कारागारों में क्यों भरा जाता. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भिखारियों को हैदराबाद से हटाने का एक मकसद डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हैदराबाद यात्रा भी है.
हैदराबाद में इवांका ट्रंप एक बिजनेस मीट में शामिल होंगी और साथ ही उन्हें हैदराबाद के खाने और संस्कृति से भी रूबरू कराया जाएगा. इवांका ट्रंप का ये हैदराबाद दौरा 28 से 30 नवंबर तक चलेगा.

हैदराबाद यात्रा के दौरान शहर की सड़कों पर इवांका ट्रंप को सिर्फ खूबसूरती ही नजर आए इसी वजह से भिखारियों को ऐसी अस्थायी जेलों में भर दिया गया है. बूढ़े, महिलाएं और बच्चे हैदराबाद की सड़कों पर जो कोई भी भीख मांगता था उसे इवांका के दौरे के मद्देनजर जेल में ठूस दिया गया है. जब इस बाबत सवाल पूछे गए तो एक कदम आगे बढ़कर बताया गया कि भिखारियों को  दो हफ्तों के अंदर हैदराबाद से हटा दिया जाएगा और इसके लिए बाकायदा ईनाम का भी ऐलान किया जाएगा. मायने साफ हैं कि इवांका ट्रंप की यात्रा से पहले हैदराबाद भिखारी मुक्त हो जाएगा

हैरानी की बात ये है कि प्रशासन भीखारियों के पुनर्वास और उनकी बेहतरी के जरिए इस प्राचीन शहर को भीक्षावृत्ति से मुक्त नहीं करने जा रही, बल्कि सीधे भीखारियों पर भीख मांगने पर ही प्रतिबंध लगा दिया है. कारागारों के अदंर कुछ भिखारी खुश भी हैं क्योंकि उन्हें वक्त से खाना मिल रहा है. अब इसे देश का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या कहेंगे कि दो जून की रोटी जैसे मूलभूत अधिकार के लिए इंसान सलाखों के पीछे भी खुशी खुशी रह रहा है.

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