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कर्नाटकः अंधविश्वास और काला जादू विरोधी बिल पारित

तर्कसंगत

November 17, 2017

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कर्नाटक विधानसभा ने अंततः विवादित विधेयक कर्नाटक अमानवीय व्यवहार और काला जादू रोकथाम और उन्मूलन विधेयक, 2017 पारित कर दिया है.

इस विधेयक को समाज कल्याण मंत्री एच अनजनैया ने मंगलवार को पेश किया था.

विधानसभा में बहस के बाद वशीकरण की प्रथा पर भी रोक लगा दी गई है.

अनजनैया ने कहा कि वशीकरण करना या इस बारे में विज्ञापन देना अब प्रतिबंधित होगा.

हालांकि विपक्ष ने विधेयक का विरोध नहीं किया लेकिन बीजेपी विधायक सीटी रवि ने तर्क दिया कि सरकार कुछ हिंदू प्रथाओं पर रोक नहीं लगा सकती है.

दलितों के खाने की पत्तलों पर लौटने की प्रथा मेढ़ मेढ़ स्नान का बचाव करते हुए बीजेपी विधायक ने कहा कि लोगों को ही तय करना चाहिए कि वो प्रथा को ख़त्म करना चाहते हैं या जारी रखना चाहते हैं.

रवि ने कहा कि अगर लोग अपनी मर्ज़ी से ये कर रहे हैं तो इसमें क्या बुराई है लेकिन यदि किसी को ऐसा करने के लिए मजबूर किया जाता है तब सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए.

बीजेपी नेताओं ने मुसलमानों में खतना की प्रथा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे बच्चों को दर्द होता है तो इसे क्यों अंधविश्वास न माना जाए.

सदन में बहस के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार पर कौआ बैठने की वजह से कार बदलने का मुद्दा भी उठाया गया जिसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने गाड़ी इस वजह से नहीं बदली थी.

क्या होगा प्रतिबंधित

इस विधेयक के तहत अमानवीय कृत्य, काला जादू, गढ़े हुए धन की खोज, तांत्रिक क्रियाएं, तंत्र विद्या के नाम पर यौन शोषण और शारीरिक चोट पहुंचाना प्रतिबंधित होगा.

लोगों को नग्न घुमाना, प्रथा के नाम पर किसी व्यक्ति को अपमानित करना और अमानवीय कृत्यों को बढ़ावा देना भी प्रतिबंधित होगा.

काला जादू, झाड़-फूंक जैसी प्रथाएं भी इस विधेयक के तहत प्रतिबंधित कर दी गई हैं.

किसी भी प्रकार की धार्मिक प्रार्थना या पूजा विधि को प्रतिबंधों की सूची में शामिल नहीं किया गया है.

धर्म या प्राचीन कलाओं और क्रियाओं के बारे में जानकारी देने. दिवंगत संतों के चमत्कारों के बारे में बताना. पूजा, उपासना और अन्य धार्मिक क्रियाओं और विधियों को भी प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है.


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