सप्रेक

सप्रेकः गुजरात का पोलियोग्रस्त किसान जो ले आया अनार की बहार

तर्कसंगत

November 29, 2017

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गुजरात के जिस इलाक़े में लोगों ने अनार की खेती की कल्पना भी नहीं की थी वहां एक पोलियोग्रस्त किसान अनार की बहार ले आया है और सालाना लाखों रुपए कमा रहे है.

हम बात कर रहे हैं पद्मश्री गेनाभाई पटेल की जिनकी मेहनत और लगन की बदौलत आज बनासकांठा ज़िले में अनारों से लदे बाग़ लगे हैं.

बनासकांठा में उगे अनार आज श्रीलंका, दुबई, मलेशिया और यूएई के लिए निर्यात होते हैं.

बीबीसी हिंदी ने गेनाभाई पर एक विशेष रिपोर्ट प्रकाशित की है.

गेनूभाई पटेल ने बताया कि आसपास का कोई किसान उनसे मदद मांगता है वो स्वयं उसके पास पहुंच जाते हैं.

गेनूभाई पटेल को बचपन में उनके भाई कंधों पर बिठाकर स्कूल ले जाते थे. उनके माता-पिता को लगता था कि पोलियो की वजह से वो खेतों में काम नहीं कर पाएंगे इसलिए वो चाहते थे कि वो अच्छे से पढ़ें और नौकरी हासिल करें.

गेनूभाई ने स्कूल में बारहवीं तक की पढ़ाई की लेकिन आगे क्या करना है इस बारे में उन्हें बहुत जानकारी नहीं थी.

अपने भाइयों को खेतों में ट्रैक्टर चलाते हुए देखकर उन्होंने भी ट्रैक्टर चलाना सीख लिया. उन्होंने हाथ से इस्तेमाल करने के लिए क्लच का हैंडल बनवा लिया और ट्रैक्टर से जुड़े काम अब वो करने लगे.

गेनूभाई ने बीबीसी से कहा, “मैं हमेशा सकारात्मक सोच रखता हूं. ऐसा नहीं हो सकता, मैं ये सोचता भी नहीं हूं. मुझसे ऐसा नहीं हो सकता, मैंने ये कभी नहीं माना. जो लोग भी काम करते थे, उन्हें मैं देखता रहता था कि क्या मैं ये काम कर सकता हूं या नहीं.

परंपरागत खेती से खर्च निकालना मुश्किल हो रहा था और गेनूभाई कुछ नया करना चाहते थे.

साल 2004 में महाराष्ट्र से अनार के पौधे लाए और अपने खेतों में लगा दिए. आलू गेहूं जैसी पंपरागत फ़सले उगाने वाले आसपास के किसानों को लगा कि गेनू पागल हो गए हैं.

गेनूभाई के खेतों में अनार की अच्छी फ़सल हुई लेकिन उन्हें बेचना चुनौती थी. आसपास के बाज़ारों में बेहद कम भाव लगाया गया. गेनू परेशान हो गए.

लेकिन जब एक फ्रूट कंपनी उनके अनार ख़रीदने पहुंची और दाम 42 रुपए प्रति किलो लगाए तब गेनूभाई की जान में जान आई. पहली फ़सल में ही मुनाफ़ा लाखों में हुआ.

अब गेनूभाई ने अपनी फ़सल में तकनीक का तड़का लगा दिया. ख़रीदारों की तलाश के लिए उन्होंने इंटरनेट की सहायता ली और ख़रीददार उनके द्वार पहुंचने लगे.

गेनूभाई की कामयाबी ने आसपास के किसानों को प्रेरित किया और आज बनासकांठा के इस इलाक़े में चारों ओर अनार के बाग़ दिखाई देते हैं.

भारत सरकार ने इसी साल गेनूभाई को पद्मश्री देकर सम्मानित किया है.

पोलियोग्रस्त इस किसान ने साबित किया है कि मेहनत और लगन से तमाम मुश्किलों को हराकर कामयाबी की इबारत लिखी जा सकती है.

गेनूभाई ने सिर्फ अपना जीवन ही बेहतर नहीं किया है बल्कि आसपास के किसानों की ज़िंदगी में भी वो सकारात्मक बदलाव लाए हैं.

Source: BBC Hindi


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