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एक सिरींज पर 525 फ़ीसदी मुनाफ़ा कमाता है मैक्स

तर्कसंगत

December 6, 2017

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अगर आप कभी अस्पताल में भर्ती हुए हैं या किसी मरीज़ की तीमारदारी की है तो आपको लगा होगा कि अस्पताल मेडिकल उपकरणों और दवाइयों पर कुछ ज़्यादा ही कमाते है.

और ऐसा महसूस करने वाले आप अकेले नहीं है. अब भारत प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच में भी इस बात की पुष्टि हो गई है.

अपनी एक जांच रिपोर्ट में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने कहा है कि मैक्स अस्पताल एक सिरींज पर 275 से लेकर 525 प्रतिशत तक कमाता है.

प्रतिस्पर्धा आयोग का कहना है कि अस्पताल मरीज़ों से अपनी फ़ार्मेसी से दवा और अन्य सामान ख़रीदने के लिए कहता है.

आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि मैक्स समूह के सभी चौदह अस्पतालों में मरीज़ों से बेहद अधिक मुनाफ़ा कमाया जा रहा है.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि कार्पोरेट अस्पतालों में मरीज़ों से मुनाफ़ा कमाने की प्रवृत्ति व्यापक रूप से प्रचलित है.

एक मरीज़ के तीमारदार विजय शर्मा ने सीसीआई (प्रतिस्पर्धा आयोग) में शिकायत दर्ज कराकर कहा था कि अस्पताल डिज़पोज़ल सिरींज पर खुले बाज़ार से अधिक क़ीमत वसूल कर रहा है.

उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि जो सिरींज बाज़ार में 11.50 रुपए में उपलब्ध है उसके बदले अस्पताल 19.50 रुपए का अधिकतम मूल्य वसूल रहा है.

दो साल चली अपनी जांच में सीसीआई ने पाया कि अस्पताल इन सिरींज पर अधिक मुनाफ़ा कमा रहा है.

आयोग के सामने सिरींज निर्माता कंपनी बीडी लिमिटेड ने कहा है कि ये भारत की सभी निर्माता कंपनियों द्वारा अपनाई जाने वाली  मानक प्रक्रिया है.

अस्पताल ने भी आयोग के सामने कहा कि सिरींज को अधिकतम प्रिंटेड मूल्य पर बेचना सभी अस्पतालों में अपनाई जाने वाली सामान्य प्रक्रिया है.

दोनों पक्षों ने भले ही ये माना हो कि वो स्टैंडर्ड बिज़नेस प्रेक्टिस अपना रहे हैं लेकिन इस जांच से पता चलता है कि भारत के निजी अस्पतालों में मरीज़ों को अधिक मूल्य चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती मरीज़ों के कुल खर्च में से लगभग आधा दवाइयों और सिरींज जैसी अन्य चीज़ों पर खर्च होता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल एक व्यापार की तरह चल हा है जो थोक के दाम पर सिरींज खरीदता है और फिर उसे मरीज़ों को एमआरपी पर बेचता है.

Source: The Times Of India


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