मेरी कहानी

मेरी कहानीः हमारे घर में एक बिस्तर के सिवा कुछ भी नहीं है लेकिन हम बहुत ख़ुश हैं

तर्कसंगत

December 13, 2017

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मैं हर शाम अपने पिता के लौटने का इंतेजार करती. मैं गांव के बाज़ार से उनके लौटने का इंतेज़ार करती रहती. मैं तब तक इंतेज़ार करती जब तक कि वो लौट नहीं आते. जब वो चेहरे पर ख़ुशी लिए लौटते तो मेरा पहला सवाल यही होता कि आप आज मेरे लिए क्या लेकर आए? और जवाब में हमेशा वही सवाल होता कि जब मैं यहा नहीं रहूंगा तब तुम्हारे लिए रोज़ाना मिठाई कौन लाएगा.

और मैं हमेशा इस सवाल पर हंसते हुए जवाब देती कि क्या आपको नहीं पता है कि मेरा शौहर कौन होगा?  मुझे अपनी मां याद नहीं है. मैं सिर्फ़ दो साल की थी जब मैंने उन्हें खो दिया दिया था. मेरे पिता ने अकेले छह साल तक मेरी देखभाल की.

इसके बाद मेरी बुआ मुझे नौकरानी की तरह काम करवाने अपने साथ ले गईं थीं.

समय कब उड़ जाता है पता ही नहीं चलता. हम दस सालों से साथ हैं. लोग कहते हैं कि हम बहुत ख़ुशहाल दंपती हैं. वास्तव में जब हम पहली बार मिले थे तब हम बहुत छोटे थे. हमने प्रेम विवाह किया है.

जब वो मेरी बुआ के घर किसी काम से आए थे तब हमारी पहली मुलाकात हुई थी. मैंने दरवाज़ा खोला और उन्हें देखा. वो मुझे देख रहे थे. मैं अनचाहे ही हंस दी थी और भाग्यवश वो भी पलटकर मुस्कुरा दिए थे.

मैं उस पल के बारे में बता नहीं सकती जब मुझे पहली बार प्यार का अहसास हुआ था. उस दिन के बाद से वो हर दिन हमारे घर के सामने आते थे. मैं बरामदे में से उन्हें सामने की दुकान पर खड़े हुए देखा करती थी.

क़रीब एक महीने बाद मैं उनसे बात कर पाई थी. मैंने उनसे पूछ ही लिया था कि वो हर दिन सामने की दुकान पर आकर क्यों खड़े हो जाते हैं और क्यों हमारे बरामदे में देखते हैं.

उन्होंने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया बल्कि मुझसे सवाल पूछा लिया कि क्या तुम मुझसे शादी करोगी?

भले ही हम बहुत ग़रीब हैं लेकिन मुझे कोई अफ़सोस नहीं है. हमारे पास एक बिस्तर के सिवा कुछ भी नहीं है. हम दोनों मिलकर बहुत कम ही पैसा कमा पाते हैं लेकिन हम कभी निराश नहीं हुए. हम दोनों एक दूसरे को पूरी तरह समझते हैं. सबसे अहम बात ये है कि हम दोनों बिना शर्त एक दूसरे को बेहद प्यार करते हैं.

वो घर के काम में भी मेरी मदद करते हैं. जब मैं काम पर जाती हूं तो वो हमारी बच्ची की देखभाल भी करते हैं. मैं जब भी पास की नदी में नहाने जाती हूं वो मेरी सुरक्षा के लिए हमेशा मेरे साथ जाते हैं.

जब मुझसे कुछ उलटा सीधा भी हो जाता है वो तब भी हम पर ध्यान देते हैं. वो हर मुमकिन तरीके से मेरी मदद करते हैं. हमारी झुग्गी में रहने वाली महिलाएं मुझसे इस बात को लेकर जलती भी हैं. अल्लाह का करम है कि वो मुझे मिले.

मुझे जीवन में बस एक ही बात का अफ़सोस है कि मेरे पिता ये नहीं देख पाए कि मैं अपने पति के साथ कितनी ख़ुश हूं.  मैं हर रात सोने से पहले रोती हूं कि मेरी पिता मेरी ख़ुशहाली नहीं देख पाए.

मैं कितनी भाग्यशाली हूं कि मुझे ऐसा पति मिला जो मेरी इस तरह देखभाल करता है जैसे मातापिता बच्चों की करते हैं. अल्लाह बड़ा मेहरबान है कि उन्होंने मुझे ऐसे शौहर दिए.

वो हमेशा मेरे लिए मिठाई लाते हैं और मेरे तकिये के नीचे रख देते हैं. मैं जब रात को अपने पिता को याद करके रोती हूं तो वो मेरे हाथ में ऐसे मिठाई रख देते हैं जैसे मैं कोई बच्ची हूं जो मिठाई के लिए रो रही है. और मैं और रोने लगती हूं. मैं अपने शौहर को अपनी ज़िंदगी से ज़्यादा प्यार करती हूं.

सोनिया और आरिफ़, via gmb akash

Every day it was my task to wait for my father in the evening. I waited, and waited for him to arrive home from our…

Posted by GMB Akash on Monday, November 27, 2017

 


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