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वाराणासीः डेट पर आया था प्रेमी जोड़ा, पुलिस ने करा दी शादी

तर्कसंगत

December 15, 2017

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उत्तर प्रदेश के वाराणासी ज़िले के एक गांव में डेट पर निकले एक प्रेमी जोड़े की कुछ ही घंटे बाद पुलिस ने शादी करा दी.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक गांववालों और रिश्तेदारों ने पुलिस की मदद से लड़का लड़की की शादी करा दी.

बुधवार को हुआ ये मामला वाराणासी के बदौरा गांव का है.

दरअसल 25 साल के युगल बिहारी प्रजापति और 23 साल की रीना प्रजापति को गांववालों ने एक साथ देख लिया था.

लोगों ने उन पर अश्लीलता का आरोप लगाते हुए पुलिस बुला ली. पुलिस प्रेमी जोड़े को थाने ले गई.

थाने में दोनों ने बताया कि वो करीब दो साल से प्रेम के रिश्ते में बंधे हैं और दोनों ने मार्च में शादी करने की योजना बनाई है.

लेकिन पुलिस ने पास के मंदिर में दोनों की शादी कराने का निर्णय कर लिया.

जानसा थाने के प्रभारी अनिल कुमार सिंह ने मीडिया को बताया कि दोनों एक बग़ीचे में बैठे थे जब गांववालों ने पुलिस बुला ली. पुलिस दोनों को थाने ले आई जहां दोनों ने शादी करने की इच्छा जाहिर की.

अनिल कुमार सिंह के मुताबिक दोनों के परिजनों की सहमति से पुलिस ने मंदिर में ही दोनों की शादी करा दी.

लड़की के पिता ने लड़के परिवार को शगुन के तौर पर एक रुपया भी दिया.

शादी में ज़रूरी बाकी सभी इंतेज़ाम पुलिसकर्मियों ने ही किए. थाना प्रभारी के मुताबिक ये दहेज रहित शादी थी जिसके बाद दूल्हादुल्हन को साथ विदा कर दिया गया.

हालांकि प्रेमी जोड़े को अभी पतिपत्नि की तरह होने में थोड़ा समय लगेगा.

युगल किशोर ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका विवाह इस तरह होगा.

उन्होंने कहा कि मेरा प्यार मेरे साथ है और उसे मैं अब मुंबई अपने साथ ले जाउंगा. युगल मुंबई में एक निजी कंपनी में काम करते हैं.

लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या पुलिस को इस तरह से पार्क में बैठे दो बालिग़ लोगों की शादी करवा देनी चाहिए.

युगल और रीना दोनों ही बालिग हैं और उन्हें अपनी मर्ज़ी से साथ होने का अधिकार है. इसके लिए विवाह का बंधन ज़रूरी नहीं हैं.

उनकी शादी दहेज रहित रही और इसका इंतेज़ाम पुलिस ने किया. ये अच्छी बात है लेकिन इससे पुलिस के नैतिकता का प्रहरी बनने का सवाल ख़त्म नहीं हो जाता.

ये मोरल पुलिसिंग का मामला है. जिस पुलिस पर देश की क़ानून व्यवस्था संभालने की ज़िम्मेदारी है वो पार्क में मर्ज़ी से बैठे प्रेमी युगलों की शादी करा रही है.

इस ख़बर के बहाने हम ये याद दिलाना ज़रूरी समझते हैं कि पुलिस का काम क़ानून व्यवस्था का ख़्याल रखना है, नैतिकता का प्रहरी बनना नहीं.

और पार्क में साथ बैठने के लिए पतिपत्नी होना भी ज़रूरी नहीं है. इस देश में अभी प्रेम पर प्रतिबंध नहीं लगा है और प्रेम करने के लिए शादीशुदा होना भी ज़रूरी नहीं हुआ है.

पुलिस को अपने क़ानूनी दायरे का ख़्याल रखना ही होगा. यदि इस मामले में क़ानून व्यवस्था का कोई प्रश्न था और युगल ने ही शादी कराने की गुहार लगाई होती तो बात अलग थी


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