सप्रेक

सप्रेकः 90 प्रतिशत ब्लाइंड आईएएस जो लिख रहे हैं कामयाबी की कहानी

तर्कसंगत

December 28, 2017

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दिल्ली में तैनात एक 90 प्रतिशत ब्लाइंड आईएएस अधिकारी कामयाबी की नई इबारत लिख रहे हैं.

उन्होंने न सिर्फ़ तीस साल से लंबित भर्ती नियमों को अंतिम रूप दिया है बल्कि सैकड़ों कर्मचारियों के प्रोमोशन का रास्ता भी साफ़ किया है.

2013 बैच के 90 प्रतिशत ब्लाइंड आईएएस अधिकारी अमन गुप्ता ने दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग भी सुधार दी है.

अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश काडर के आईएएस अमन गुप्ता आईआईएम ग्रैजुएट भी हैं.

वो एक स्टैंड पर लगे वीडियो मैग्नीफ़ायर के ज़रिए पढ़ते हैं. अमरीका निर्मित ये उपकरण ख़ासतौर से ब्लाइंड लोगों को पढ़ने में मदद करने के लिए विकसित किया गया है.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमन गुप्ता की आंखों की रोशनी अब इतनी कमज़ोर है कि वो लोगों को पहचान तक नहीं पाते हैं.

गुप्ता जब बारहवीं क्लास में थे तब वो मोटरसाइकिल तक चला लेते थे. लेकिन समय के साथ उनकी आंखों की रोशनी जाती रही. वो जुवेनाइल मैक्लूयलर डीजेनेरेशन से पीड़ित हैं. इस बीमारी का कोई ज्ञात इलाज नहीं है.

2002 में एम्स में इलाज के दौरान उन्हें इस बीमारी का पता चला था. अब सिर्फ़ उनकी आंखों में देखने की दस प्रतिशत क्षमता ही रह गई है.

बावजूद इसके गुप्ता ने न सिर्फ़ चुनौतियों को स्वीकार किया है बल्कि कामयाबी भी हासिल की है.

गुप्ता कहते हैं कि उन्होंने ऑडियो बुक्स के ज़रिए सिविल सेवा की तैयारी की थी लेकिन वो 2012 में सिविल सेवा परीक्षा में नाकाम रहे थे.

इसके बाद उन्होंने और समय लगाया और अगले साल सामान्य श्रेणी में सिविल सेवा में 57वीं रैंक हासिल की है.

वो इस समय तीन अहम पदों पर तैनात हैं. वो निदेशक कार्मिक विभाग हैं, अतिरिक्त निदेशक शिक्षा हैं और दक्षिण दिल्ली नगर निगम के आयुक्त के सचिव हैं.

इससे पहले वो पश्चिमी ज़ोन को उपायुक्त थे और उससे पहले वो चाणक्यपुरी के एसडीएम थे.

हालांकि कई बार उन्हें दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा है. पश्चिम ज़ोन का उपायुक्त रहते हुए जब वो अधिकारियों की बैठक लेते थे तो कई बार अधिकारी बैठक से ही उठकर चले जाते थे. हालांकि जब बाद में उन्हें इसका पता चलता तो वो कारण बताओ नोटिस भी जारी करे हैं.

एसडीएमसी में तैनाती के दौरान जब एक बार उन्होंने एक अधिकारी से हाथ नहीं मिलाया तो वो बुरा मान गए. गुप्ता कहते हैं कि, “मैं देख नहीं पाया कि वो हाथ मिलाना चाह रहे हैं. मैंने बाद में उन्हें बताया कि मैं 90 प्रतिशत ब्लाइंड हूं और देख नहीं पाता हूं.”

तमाम मुश्किलों के बावजूद अमन गुप्ता अपनी सभी प्रशासनिक ज़िम्मेदारियों को निभा रहे हैं. वो मैग्निफ़ायर के ज़रिए पढ़ते हैं जिसमें दोगुना समय लगता है.

उन्हें कई तरह की दिक्कतें आती हैं लेकिन बावजूद इसके वो दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारी हैं और 600 स्कूलों का प्रबंधन देखते हैं. इन स्कूलों में ढाई लाख बच्चे पढ़ते हैं.


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