सप्रेक

सप्रेकः वो ठेले पर नमकीन बेचती थीं, मौके का फ़ायदा उठाकर कर अब कारोबार कर रही हैं

Poonam

December 28, 2017

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ोमहाराष्ट्र के  अमरावती ज़िले की रहने वाली लता कालासकर अपने गांव की अन्य लड़कियों से ज़्यादा पढ़ी लिखी थीं.  उनका जीवन अच्छा चल रहा था और फिर उनकी शादी भी हो गई.

लेकिन लता के भाग्य में चुनौतियां लिखीं थीं. उनके पति का कारोबार बंद हो गया और परिवार पर आर्थिक बहुत ज़्यादा बढ़ गया.

हालात तब और ख़राब हो गए जब बीमारी की वजह से उनके सबसे छोटे बेटे की मौत हो गई. बीमारी के लिए लता को ही ज़िम्मेदार ठहरा दिया गया.

उन्होंने अपने गांव की महिलाओं के साथ मिलकर ‘महिला बचत गठ’ शुरू किया. उन्हें उम्मीद थी कि महिलाएं साथ मिलकर काम करेंगी और इससे उन्हें आर्थिक आज़ादी मिल जाएगी और वो स्वतंत्र हो जाएंगी. वो नहीं चाहती थीं कि महिलाएं ऐसे ही बेबस महसूस करें जैसे वो करती थीं.

इसी दौरान उन्हें आईसीआईसीआई बैंक के एक सेल्फ़ हेल्प ग्रुप कार्यक्रम के बारे में पता चला. ये ग्रामीण भारत की पिछड़ी महिलाओं को बैंक के साथ जोड़ने का एक विशेष कार्यक्रम है. महिला समूहों को कर्ज़ देने वाले इस कार्यक्रम की मदद से लता ने अपना कारोबार बढ़ा लिया.

लता पहले एक ठेले पर नमकीन बेच रहीं थीं लेकिन पैसा मिल जाने के बाद उन्होंने अपने कारोबार का स्तर बढ़ा दिया.  बैंक से मिले 67 हज़ार रुपए के क़र्ज़ ने लता के रास्ते आसान कर दिए.

वो कहती हैं, मैं बता नहीं सकती कि मुझे कितनी ख़ुशी हुई थी.

आज लता का सबसे छोटा सबना उनके जीवन की सबसे बड़ी हक़ीक़त है. अब उन्होंने बैंक से मिले एक अन्य क़र्ज़ से एक टैंपो ख़रीद लिया है. वो नमकीन बनाती है और इस टैंपों से बड़े बाज़ार में बेचती हैं. अब वो अच्छा पैसा कमा लेती हैं.

लता को भरोसा है कि अब वो अपने बेटे को अच्छे से पढ़ा पाएंगी और उसे एक सुरक्षित भविष्य दे पाएंगी.

एक समय था जब लता के पास कुछ भी नहीं था. लेकिन अब उनके पास पैसा और पहचान दोनों हैं. दूर-दूर से लोग उनकी नमकीन ख़रीदने आते हैं.

वो कहती हैं, दूसरों के लिए ये सिर्फ़ नमकीन के बैग हैं, मेरे लिए ये आत्मसम्मान हैं और मेरे परिवार के लिए खुशहाली हैं.

लता उन लगभग पच्चीस लाख महिलाओं में से एक हैं जिन्हें आईसीआईसी बैंक के महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम से लाभ पहुंचा हैं.

लता की कहानी बताती है कि कभी कभी सही वक़त पर मिली मदद जीवन बदल देती हैं. यदि आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े

ब्रांड लोगों का जीवन संवारने में आगे आते हैं तो अगले कुछ सालों में हमें व्यापक स्तर पर बदलाव दिख सकता है.

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