मेरी कहानी

मेरी कहानीः मैंने पढ़ाई छोड़ दी, मैं अब तक छह हज़ार सरीसृपों को बचा चुका हूं

Poonam

January 2, 2018

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मैं बचपन से ही जानवरों के बारे में जानने में उत्सुक रहता था. जब मेरी उम्र के बच्चे एक दूसरे के साथ खेलते थे तब मैं जानवरों और पक्षियों के साथ खेलता और उन्हें देखता रहता.

मैं अपने घर में सांप, छिपकलियां, बिच्छु छुपाकर अपने साथ रखता था. मेरे परिजनों को कभी पता ही नहीं चलता क्योंकि ये रेप्टाइल्स आवाज़ ही नहीं करते थे.

रात में मैं उनके व्यवहार पर नज़र रखता और वो जो कुछ भी करते उस बारे में नोट्स बनाता.

मैंने कई चार्ट, डायाग्राम और स्ट्रक्चर बनाए जो मुझे इन जानवरों को और बेहतर तरीके से समझने में मदद करते.

और एक दिन मेरे घरवालों को मेरे इन साथियों के बारे में पता चल गया. उस वक्त मुझे पशु सुरक्षा अधिनियम के बारे में भी जानकारी नहीं थी और पता नहीं था कि इनमें से कुछ को अपने पास रखना ग़ैर क़ानूनी है.

समय बीतता गया लेकिन जानवरों और जंगली जीवन के बारे में मेरी रूची बरक़रार रही. लेकिन मुझे कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिल पाया जो मुझे इस रूची को पेशे में बदलने में मदद कर पाता.

मैंने कंप्यूटर का क्षेत्र चुन लिया. ग्रेजुएशन के दो साल ही बीते थे कि मुझे अंदाज़ा हो गया कि ये वो जगह नहीं है जहां मेरा दिल लगता है.

मैंने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और मैं जानवरों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों के साथ काम करने लगा.

मैंने शहर में वाइल्ड लाइफ़ रीहेबिलिटेटर के तौर पर काम करना शुरू किया और कई बचाव अभियान किए,

मैंने मगरमच्छों और ज़हरीले सांपों में महारथ हासिल कर ली.

जानवरों के प्रति मेरी यही रूची मुझे थाईलैंड, अमरीका, श्रीलंका, भूटान और न जाने कितने और देशों तक ले गई. मैंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ काम किया है. अब तक मैं सौ से ज़्यादा प्रजातियों के छह हज़ार से अधिक सरीसृपों को बचा चुका हूं.

एक ऐसा भी मौका आया था जब मैं बहुत घबरा गया था. हम चंबल में घड़ियालों को पकड़कर उनमें रेडियो ट्रांसमीटर लगा रहे थे. ये एक शोध कार्य के लिए किया जा रहा था.

मुझे एक 17.6 फुट लंबा घड़ियाल दिखा.  ये एक विलुप्तप्राय प्रजाति का घड़ियाल था जो दुनिया के सबसे लंबे मगरमच्छों में भी शामिल था. मैं उसे पकड़कर ज़मीन पर ले आया. हमने उसके शरीर पर बिना किसी खरोंच के ट्रांसमीटर लगा दिया और उसे सुरक्षित पानी में छोड़ दिया. ये प्रोजेक्ट मेरे जीवन का सबसे  डरा देने वाला प्रोजेक्ट था.

हमें ये समझने की ज़रूरत है कि हम इस धरती को अन्य प्राणियों के साथ साझा करते हैं. हमें उनके साथ रहना सीखना होगा और सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें भी जीने के लिए सही वातावरण मिले.

  • सोहम मुखर्जी, स्रोतः Humans of Amdavad

Story of the day: Soham Mukherjee “Since childhood I was curious to know about animals. While kids of my age would…

Geplaatst door Humans Of Amdavad op vrijdag 22 december 2017

 


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