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इलाज 22 दिन, बिल 18 लाख, फिर भी नहीं बची गर्भवती महिला और उसके बच्चे की जान

तर्कसंगत

January 12, 2018

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निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर लूट खसोट का खेल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल के बाद फरीदाबाद के एशियन अस्पताल का नया मामला सामने आया है. इस अस्पताल पर भी ऐसे ही संगीन आरोप लगे हैं की बुखार से पीड़ीत एक गर्भवती महिला के 22 दिन के उपचार का बिल 18 लाख थमा दिया गया लेकिन  महिला और उसके गर्भ में पल रहे आठ माह के बच्चे को भी बचाया नहीं जा सका.

फऱीदाबाद के नचौली के रहने वाले सीताराम ने अपनी 20 साल की बेटी श्वेता को 13 दिसम्बर को बुखार होने पर अस्पताल में भर्ती करवाया.अस्पताल में तीन-चार दिन इलाज के बाद डॉक्टरों ने परिजनों से कहा कि बच्चा पेट में मर गया है.

परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने साढ़े तीन लाख रुपए जमा कराने का पर ही ऑपरेशन करने की बात कही. परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन में देरी की वजह से श्वेता के पेट में इंफेक्शन फैल गया. हालत बिगड़ने पर श्वेता को आईसीयू में भर्ती कराया गया.

सीताराम का आरोप है कि जब वो 5 जनवरी को आईसीयू में एडमिट श्वेता से मिलने गए तो उनकी बेटी बेसुध पड़ी थी. परिजनों का ये भी आरोप है की अस्पताल प्रशासन और पैसे जमा कराने के लिए बराबर दबाव डालता रहा और पैसे देने से मना कर दिया गया, तो उसके कुछ समय बाद श्वेत को मृत घोषित कर दिया गया. घरवालों की माने तो अस्पताल ने बिल के नाम पर उनका जो टॉर्चर किया है, वो उससे उबर नहीं पा रहे हैं.

इस मामले में अस्पताल प्रबंधन मृतक के पिता के आरोपों को खारिज कर रहा है.  पूरे मामले पर सफाई देते हुए एशियन अस्पताल के क्वालिटी एंड सेफ्टी चेयरमैन डॉक्टर रमेश चांदना ने कहा कि, महिला 32 हफ्ते की गर्भवती थी और उसे 8 से 10 दिन से बुखार था. पहले हमें लगा कि उसे टाइफाइड है और आईसीयू में उसका इलाज शुरू कर दिया. उसका बच्चा बच नहीं सका. हमें पता चला कि उसकी आंत में छेद है. हमने सर्जरी की लेकिन उसे बचा नहीं सके. हालांकी भारी भरकम बिल पर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि 18 लाख रुपए का खर्च आया था. परिजनों ने करीब दस लाख रुपए जमा कराये थे. बिल की बाकी रकम अस्पताल ने माफ कर शव परिजनों को सौंप दिया है

घरवाले अस्पताल पर लापरवाही और धांधली का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. लेकिन ऐसे मामले कहीं न कहीं हमाने स्वास्थय महकमे पर सवाल जरूर खड़ा करते हैं.


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