मेरी कहानी

मेरी कहानीः 28 की उम्र में 45 सर्जरी और दाहिना हाथ खोने के बाद मैं ज़िंदादिली से जीती हूं

तर्कसंगत

January 14, 2018

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मैं सिर्फ़ 12 साल की थी जब एक फ़िशिंग रॉड से खेलते हुए मैं करंट की चपेट में आ गई थी. रॉड खिड़की से बाहर निकल गई थी और उसे पकड़ने के चक्कर में मैंने बिजली का तार पकड़ लिया था.

11 हज़ार वोल्ट करंट मेरे दाएं हाथ से निकला था. मुझे आईसीयू में भर्ती कराया गया था. मैं बुरी तरह झुलस गई थी.

एक सप्ताह बाद गैंगरीन को फैलने से रोकने के लिए मेरा दायां हाथ काटना पड़ा था.

मैं उस समय सिर्फ़ 12 साल की थी और जो हुआ था उसकी गंभीरता को समझ नहीं पाई थी. मैं बस इतना जानती थी कि मुझे फिर से एक अबोध बच्चे की तरह ज़िंदगी शुरू करनी है.

उस मुश्किल दौर में मेरे मातापिता और दोस्त आधार स्तंभों की तरह थे. मेरे पिता ने तो एक नियम ही बना दिया थाजो भी मुझसे मिलने आएगा वो पहले एक चुटकुला सुनाएगा फिर आगे बात होगी.

और इससे मुझे बहुत मदद मिली. मैं हंसना सीख गई थी. मैं मुस्कुराहट के साथ दुनिया का सामना करना सीख गई थी.  मैं अपने जीवन के इस नए सच का सामना करना सीख गई थी.

मेरा पहला काम प्रोस्थेटिक ऑर्म की मदद से लिखना सीखना था. शुरुआत में ये नामुमकिन जैसा था. मेरा आयुर्वेदिक इलाज चल रहा था. मैं हर दिन कलम को मज़बूती से पकड़ना सीख रही थी. और एक दिन मैंने कलम थाम ही ली.

मैंने अपना पहला शब्द लिख दिया था और इलाज ख़त्म होने तक मैंने अपनी पूरी किताबमाटिल्डालिख दी थी. ये एक कमाल की जीत थी.

दरअसल मैं जीवन की चुनौतियों की ओर देखने के बजाए इस ज़िंदगी के दूसरे मौके के तौर पर देख रही थी. और सारा कमाल इसी नज़रिए की वजह से हुआ.

वो दिन जब मैंने पहली बार अपने बैग की चैन स्वयं लगाई से लेकर उस दिन तक जब मैंने स्कूल जाने के लिए अपनी पोशाक़ स्वयं पहनी और फिर दरवाज़ा अपने हाथ से बंद किया, परीक्षा के पेपर ख़ुद लिखे. ये हर दिन मेरी ज़िंदगी का एक जश्न था.

मैंने बीकॉम की डिग्री हासिल की, एमबीए किया और दो साल तक अपने दम पर जी. तब मेरी समझ में आ गया था कि मेरी विकलांगता बस मेरे जीवन का एक हिस्सा है न की पूरा जीवन.

शुरुआत में मैं लंबी स्लीव्स के पीछे अपने हाथों को छुपाती थी और छोटे कपड़े नहीं पहनती थी क्योंकि मेरी पूरी टांगों पर जख़्मों के निशान रह गए हैं. लेकिन समय के साथ मैंने अपने जख़्मों और कमियों को स्वीकार करना सीख लिया. मैं आज जो भी हूं उन्हीं की वजह से तो हूं. निडर और सकारात्मक.

28 साल की उम्र में मेरी पैंतालीस सर्जरी हो चुकी हैं. मैंने अपना दायां हाथ खो दिया है लेकिन मैं अपने जीवन का पूरा आनंद लेती हूं. मैंने जिससे प्यार किया उससे शादी की है. वो ही मुझे ऊपर उठाते हैं, मेरे बिज़नेस में फुलटाइम काम करते हैं. मैं एक बॉस की तरह ड्राइव करती हूं.

मैंने स्काई डाइव किया है, बंजी जंपिंग की है कई बार खुले पानी में गोते लगाए हैं और न जाने कितनी और चीज़ें हैं जो मैं करना चाहती हूं.

लेकिन इस सबसे पहले मैं ज़िंदगी के हर छोटेछोटे पल को सेलिब्रेट करती हूं, हर छोटी जीत का जश्न मनाती हूं और इस राह पर नाचते हुए चलती हूं.

पौलिमी पटेल

स्रोतः Humans of Bombay

“I was 12 years old when I got electrocuted while playing with a fishing rod. The rod slipped out of the window and…

Geplaatst door Humans of Bombay op zondag 7 januari 2018

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