ख़बरें

हरियाणा जहां से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा सबसे पहले बुलंद किया गया लेकिन बेटी बचाने की इच्छाशक्ति सवालों के घेरे में है.

तर्कसंगत

January 15, 2018

SHARES

दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद सख्त कानून बन गया मगर सच्चाई ये है कि लड़कियों की न ही तकदीर बदली और न ही दरिंदों के हौसले कम हुए. हरियाणा के ज़िंद जिले में निर्भया कांड की तरह ही दरिंदगी और हैवानियत का मामला सामने आया है जो रूह कंपाने वाला है. 14 साल की एक बच्ची के साथ गैंगरेप किया गया और उसके बाद उसके साथ भयानक क्रूरता की गई. हरियाणा के बुढ़ाखेड़ा इलाके में इस लड़की का शव मिला तो सनसनी फैल गई. इस बच्ची के शव पर कपड़े नहीं थे और वो शव बुरी तरह क्षत विक्षत हालत में था. दरिंदों की क्रूरता का अंदाज आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इस नाबालिग लड़की का लिवर भी क्षतिग्रस्त पाया गया. बच्ची के प्राइवेट पार्ट्स पर भी गहरे जख्म मिले.

 

आशंका जताई जा रही है कि इस बच्ची के साथ दरिंदगी करने वालों ने उसके शरीर को लोहे के पाइप जैसी कोई सख्त चीज से घायल किया. लड़की की डेडबॉडी इस कदर खराब हो चुकी थी कि उसका पोस्टमार्टम ज़िला अस्पताल में होने की बजाय रोहतक पीजीआई में कराने के लिए भेजना पड़ा.

अभी तक इस बच्ची की पहचान नहीं की जा सकी है और न ही आरोपी पकड़े जा सके हैं. हालांकि पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है लेकिन इस पूरे मामले में पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है लड़की पहचान करना, साथ ही उन दरिंदो तक पहुंचना जिन्होंने न केवल ज़िले बल्कि प्रदेश में लड़कियों की हिफाजत पर सवाल खड़े कर दिया हैं. वो भी उस प्रदेश पर जहां से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा सबसे पहले बुलंद किया गया.

जींद के अलावा फरीदाबाद में चलती कार में लड़की से गैंगरेप की वारदात भी सामने आई है. 14 जनवरी को 22 साल की लड़की को अगवा किया गया और फिर उसके साथ वारदात को अंजाम दिया गया. बताया जा रहा है कि वारदात के वक्त पीड़ित अपने बुआ के लड़के से बात कर रही थी. इस मामले में तीन बदमाशों पर गैंगरेप को अंजाम देने का आरोप है. लेकिन 48 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली है और मीडिया में मामला आने के बाद SIT का गठन कर दिया गया है. दावा किया जा रहा है कि सभी आरोपियों की पहचान कर ली गई और जल्द ही सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की बात कही जा रही है.

वैेसे जो बात सबसे ज्यादा हैरान करती है की 5 मंत्रालय के 100 से ज़्यादा सेक्रेटी स्तर के आईएएस अफसर निर्भया फंड की देखरेख के लिए हैं फिर भी बेकार पड़ा है निर्भया फंड.

खर्च नहीं हो पा रहा निर्भया फंड

निर्भया फंड के 3100 करोड़ रूपये में से 1447.32करोड़ रूपये का ही केंद्र और राज्य सरकार इस्तेमाल कर पाई है.
गृह मंत्रालय के पास निर्भया फंड बनने के बाद पहले दो सालों 2014-2016 तक कोई फंड नहीं पहुंचा.
गृहमंत्रालय को 2016 से 2018 के बीच 1265 करोड़ रूपये मांगे, जिनमें 1106.44करोड़ रुपए मिले.
रेलवे के निर्भया फंड बनने के बाद पहले दो सालों 2014-2016 तक कोई फंड नहीं पहुंचा.
रेलवे ने 500 करोड़ मांगे,2016 -2017 में 50 करोड़ मिले, जबकि 2017 -2018 में एक पैसा नहीं मिला.
मिनिस्ट्री आफ इलेक्ट्रानिक एंड आईटी तक पहले दो सालों 2014 -2016 तक कोई फंड नहीं पहुंचा.
मिनिस्ट्री आफ इलेक्ट्रानिक एंड आईटी ने 3.5 करोड़ मांगे, 2016-2017 में 2.44 करोड़ मिले, जबकि 2017-2018 में एक पैसा नहीं मिला.
निर्भया फंड की नोडल मिनिस्ट्री महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पहले साल 2014 में फंड का इस्तेमाल नहीं किया.
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने खुद के लिए 640 .17  करोड़ की मंज़ूरी दी थी.
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 2015  से 2018  तक 640 .17  करोड़ में से 99 .71  करोड़ ही रिलीज़ किया.

इन आंकड़ो से ये तो जाहिर है की कागजी कार्रवाई तो कर दी गई है लेकिन कब ऐसे मसलों पर पूरे तरीके से काम किया जायेगा.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...