ख़बरें

ओडीशाः पुलिस कार्रवाई से निराश नाबालिग गैंगरेप पीड़िता ने की आत्महत्या

तर्कसंगत

January 24, 2018

SHARES

ओडीशा में एक बलात्कार पीड़िता ने सोमवार को आत्महत्या कर ली. पीड़िता अपराधियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई न होने से परेशान थी.

स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक लड़की के साथ अक्तूबर 2017 में सेना के जवानों ने कथित तौर पर बलात्कार किया था.

मामले में पुलिस की ओर से कार्रवाई न किए जाने से आजिज आकर पीड़िता ने अपनी जान दे दी.

इस नाबालिग दलित लड़की ने मीडिया को बताया था कि उसके साथ सेना के चार जवानों ने गैंगरेप किया. पीड़िता का कहना था कि पुलिस ने उस पर मामला वापस लेने के लिए दबाव बनाया है.

काउंटर करंट्स पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता ने मीडिया को दिए अपने बयान में कहा था कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मामला वापस लेने के लिए उसे पैसे देने का लालच भी दिया था.

इस मामले पर ओडीशा में काफी विवाद भी हुआ था.  पहले इस मामले में क्राइम ब्रांच को जांच दी गई थी और बाद में एक जज की निगरानी में इसकी न्यायिक जांच के आदेश दिए गए थे.

बलात्कार का मामला जब सामने आया था तब स्थानीय लोगों ने कई दिन तक प्रदर्शन भी किए थे.

पीड़िता के आत्महत्या कर लेने के बाद अब भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी राज्य सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया है.

घोर अन्याय

जब भी पुलिस या सेना के जवानों के हाथों बलात्कार के मामले सामने आते हैं तब जांच में आमतौर पर बिलंब होता है. शुरुआत में तो मामले ही दर्ज नहीं किए जाते हैं.

पीड़िता के बलात्कार का मामला दर्ज करवाने के बाद सात नवंबर को राज्य सरकार के मानवाधिकार सैल ने कह दिया था कि बलात्कार होने के साक्ष्य मौजूद नहीं है. इसके बाद पीड़िता ज़िला बाल कल्याण समिति के समक्ष चली गई थी.

जब भी पत्रकारों ने पीड़िता से बात की उसने कार्रवाई न होने पर गुस्सा ही ज़ाहिर किया.

पीड़िता ने अपने बयान में कहा था कि उसके साथ वर्दिधारियों ने बलात्कार किया है लेकिन इसके बावजूद अभियुक्तों की पहचान करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई.

यही नहीं पुलिस ने पूछताछ के लिए लड़की के गांव से ही चार लड़कों को उठा लिया था जिन्हें पीटा भी गया था.

इन चारों में से एक का तो ज़बरदस्ती लाई डिटेक्शन टेस्ट भी करवाया गया था.

पुलिस अधिकारियों ने शुरुआती बयानों में तो माओवादियों तक को बलात्कार के लिए ज़िम्मेदार बता दिया था.

पुलिस अधिकारियों ने अपने बयान में कहा था कि इस क्षेत्र में सक्रिय माओवादी भी वर्दी पहनते हैं.

पीड़िता अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती थी लेकिन घटना के बाद से हुए अवसाद के कारण वो स्कूल भी नहीं जा रही थी.

इस नाबालिग दलित लड़की की आत्महत्या ने क़ानून व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जिस लड़की ने क़ानून से नाउम्मीद होकर जान दे दी हो क्या उसके लिए ये उम्मीद की जा सकती है कि ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा मिल पाएगी?


Contributors

Edited by :

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...