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राजस्थानः दलित सिपाही ने बीवी बच्चों संग क्यों की आत्महत्या?

तर्कसंगत

January 25, 2018

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राजस्थान  के नागौर ज़िले में सिपाही गेनाराम मेघवाल ने 21 जनवरी को अपनी पत्नी संतोष देवी और दो बच्चों के साथ आत्महत्या कर ली थी.

गेनाराम मेघवाल का परिवार नागौर के बगरासार गांव में रहता था. उनकी आत्महत्या के बाद सवाल उठ रहा है कि आख़िर एक दलित सिपाही ने अपने परिवार के साथ क्यों जान दे दी.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक गेनाराम मेघवाल परेशान चल रहे थे

उन्हें मिलने वाले बताते हैं कि दुआ सलाम के बाद वो छह साल पहले हुए एक मामले को लेकर अपने शोषण के चलते तनाव की बातें करने लगते थे.

गांववालों के मुताबिक गांव में सबको पता था कि गेनाराम तनाव में थे. वो हमेशा कहते रहते थे कि उन्हें धमकाया जा रहा है.

अपने दो बच्चों और पत्नी के साथ जान देने से पहले गेनाराम मेघवाल ने पांच पन्नों का एक सुसाइड नोट लिखा था जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया था.

मेघवाल ने एक सब इंस्पेक्टर और दो पूर्व पुलिसकर्मियों पर साल 2012 के एक चोरी के मामले में अपने और बच्चों का शोषण किए जाने के आरोप लगाए हैं.

पुलिस विभाग में ही कार्यरत एक दलित सिपाही ने लंबे समय से प्रताड़ना के चलते पूरे परिवार सहीत की आत्महत्यामामला सुरपालिया …

Geplaatst door Balveer Bigga op zondag 21 januari 2018

 

मेघवाल के पिता खुमाराम मेघवाल कहते हैं कि ये कहानी साल 2009 में शुरू हुई थी जब उनके बेटे गेनाराम मेघवाल ने गांव तौसर में तेरह बीघा ज़मीन खरीदी थी. उस समय वो राधा किशन माली नाम के एक सब इंस्पेक्टर के दोस्त हुआ करते थे.

माली पर अब आत्महत्या के लिए उकसाने का मुक़दमा दर्ज किया गया है. उन पर एससी एसटी एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं.

साल 2012 में माली ने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ अपने घर से गहने चोरी करने का मुक़दमा दर्ज करवाया था.

मेघवाल परिवार का आरोप है कि इसके कुछ दिन बाद माली ने अपने एक साथी से गेनाराम मेघवाल की तेरह बीघा ज़मीन का सौदा करा दिया. ज़मीन नाम करा देने के बाद माली के साथी ने पैसा देने से इनकार कर दिया.

परिवार का आरोप है कि बाद में जब मेघवाल ने ज़मीन के पैसे मांगे तो माली ने अपने घर गहने चोरी करने का शक़ मेघवाल के नाबालिग बेटे पर ज़ाहिर कर दिया.

आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने मेघवाल के बेटे को हिरासत में लिया और पीटा. जिन पुलिसकर्मियों ने पिटाई की उनमें माली भी शामिल थे.

हालांकि नागौर के सुरपालिया थाने की पुलिस के मुताबिक साल 2014 में जब चोरी के इस मुक़दमे में अंतिम रिपोर्ट लगाई गई तब इसे फ़र्जी बताया गया था.

मेघवाल पुलिस विभाग में सिपाही और ड्राइवर थे. उन्होंने कई अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई लेकिन किसी ने भी मदद नहीं की. अंत में उन्होंने अपना सरकारी आवास छोड़ दिया और गांव आकर रहने लगे.

लेकिन बीते महीने मेघवाल के घर एक नोटिस पहुंचा जिसमें उनके बेटे से चोरी के उसी मामले में पुलिस के सामने पेश होने के लिए कहा गया था. यही नहीं चोरी के मामले में दर्ज रिपोर्ट को रद्द करने के लिए मेघवाल ने जो अर्जी दायर की थी उसे भी इसी महीने खारिज कर दिया गया था.

माना जा रहा है कि इस नोटिस के बाद ही मेघवाल ने अपने परिवार के साथ आत्महत्या करने का फ़ैसला ले लिया.

फिलहाल माली फरार हैं और उन्हें निलंबित कर दिया गया है. उनके अलावा दो भवरू खान और रतनराम पर  भी आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है.

मेघवाल के परिवार का आरोप है कि अगर वो दलित नहीं होते तो इस हद तक उनका शोषण नहीं किया जाता और किसी न किसी स्तर पर उनकी सुनवाई हो गई होती.

मेघवाल परिवार के चार लोगों की आत्महत्या के बाद एक बार फिर से दलित अधिकारों का मुद्दा राजस्थान में गरम हो गया हो.

स्रोतःइंडियनएक्सप्रेस

फोटोः सबरंग इंडिया


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