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सरकार ने किया निराश तो गांववालों ने ख़ुद बनाया पुल

तर्कसंगत

January 28, 2018

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उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती ज़िले में सरकार और प्रशासन से निराश ग्रामीणों ने अब स्वयं ही पुल बना लिया है.

स्थानीय अख़बार अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक श्रावस्ती ज़िले के सिसवारा घाट के आसपास के गांवों के लोग लंबे समय से पुल बनाने की मांग कर रहे थे.

लेकिन जब शासन और प्रशासन ने गांववालों की एक न सुनी तो उन्होंने अपने दम पर ही सिसवारा घाट पर पुल बनाने का फ़ैसला कर लिया.

अब ग्रामीणों ने राप्ती नदी पर बांस व बल्लियों के सहारे पुल बना दिया है जिससे आसपास के तैंतीस गांवों के लोगों का गिलौला व भिनगा मुख्यालय से संपर्क स्थापित हो गया है.

राप्ती नदी पर पुल न होने की वजह से यहां के तैंतीस गांवों के लोग स्थानीय ब्लॉक मुख्यालय से कटे हुए थे. लोगों को नाव के ज़रिए नदी पार करनी पड़ती थी.

ग्रामीणों ने कई बार सरकार और प्रशासन से पुल बनाने की गुहार लगाई लेकिन हर बार उसे अनसुना ही कर दिया गया.

लोगों के प्रयास से बने पुल से अब न सिर्फ़ मोटरसाइकिलें बल्कि हल्की गाड़ियां भी गुज़र सकेंगी.

पुल बन जाने के बाद गिलौला और भिगना मुख्यालय जाने वाले ग्रामीणों को पच्चीस किलोमीटर का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा.

ग्रामीणों ने अपने दम पर पुल तो बना लिया है लेकिन इससे सरकार की उदासीनता भी ज़ाहिर होती है.

एक और भारत के प्रधानमंत्री हर गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के दावा करते हैं और दूसरी ओर ग्रामीणों को संपर्क स्थापित करने के लिए स्वयं ही पुल बनाना पड़ता है.

राप्ती नदी पर स्थानीय लोगों के प्रयास से बना बांस और बल्ली का ये पुल सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है.


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