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नौकरी वापस पाने हाई कोर्ट पहुंचे बीएसएफ़ जवान तेज बहादुर यादव

तर्कसंगत

February 1, 2018

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बीते साल अप्रैल में नौकरी से निकाले गए बीएसएफ़ के जवान ने अपनी नौकरी वापस पाने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है.

तेज बहादुर ने बीएसएफ़ जवानों को खराब खाना मिलने के आरोप लगाते हुए वीडियो फ़ेसबुक पर पोस्ट किए थे जो वायरल हो गए थे.

अब अपनी याचिका में तेज बहादुर यादव ने कहा है कि उसने वो वीडियो अपने अफ़सरों को दिखाने के लिए बनाए थे जिन्हें उसके सहकर्मियों ने फ़ेसबुक पर डाल दिया.

तेज बहादुर का कहना है कि उसे नहीं पता कि ये वीडियो कैसे उसके अकाउंट से फ़ेसबुक पर पोस्ट किए गए.

वहीं इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने तेज बहादुर के विदेशी ताक़तों से संबंधों की जांच की थी.

एनआईए ने तेज बहादुर के विदेशियों से संपर्क होने की भी जांच की थी.

एनआईए ने यादव के सोशल मीडिया प्रोफ़ाइलों के अलावा उसकी कॉल डिटेल की भी गहन जांच की थी.

लेकिन जांच में तेज बहादुर  के ख़िलाफ़ कुछ नहीं मिला था.

तेज बहादुर यादव ने नौकरी वापस पाने के लिए पंजाब और हरयाणा हाईकोर्ट में जो याचिका पेश की है उसमें एनआईए की ये रिपोर्ट भी सलंग्न की है.

रिपोर्ट के मुताबिक बीएसएफ़ के महानिदेशक केके शर्मा ने वीडियो वायरल होने के कुछ दिन बाद ही एनआईए जांच की मांग कर दी थी.

अपनी याचिका में तेज बहादुर यादव ने कहा है कि उनका मक़सद सिर्फ़ खराब खाने के बारे में जानकारी अधिकारियों को देना था ताकि सीमा पर सेवाएं दे रहे जवानों को बेहतर गुणवत्ता का खाना मिल सके.

उन्होंने कहा है कि उनके मन में कोई दुर्भावना नहीं थी.

यादव की याचिका पर अब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही है. मंगलवार को हाई कोर्ट ने गृह मंत्रालय, बीएसएफ़ के महानिदेशक केके शर्मा और 80 और 29 बटालियन के मुख्यालय को नोटिस जारी किया है.

यादव का आरोप है कि बीते साल 31 जनवरी को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के आधे घंटे के भीतर ही उसे अवैध हिरासत में ले लिया गया था और बिना कारण बताओ नोटिस दिए ही नौकरी से निकाल दिया गया था.

बहादुर ने अपने निलंबन को अवैध बताते हुए इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बताया है.


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