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शर्मनाकः फ़ीस न जमा होने पर स्कूल ने निकाला, बच्ची ने की आत्महत्या

तर्कसंगत

February 2, 2018

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हैदराबाद में एक चौदह वर्षीय छात्रा की आत्महत्या हमारी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

मंगलवार को शहर के मलकागिरि इलाक़े में एक छात्रा ने अपने घर में ही आत्महत्या कर ली.

छात्रा को स्कूल में परीक्षा के दौरान फ़ीस न चुकाने की वजह से वापस घर भेज दिया गया था. वो इसी बात से परेशान थी.

लड़की के शव के पास मिले नोट में लिखा है, “उन्होंने मुझे परीक्षा नहीं देने दी, सॉरी मोम.”

लड़की के परिवार का आरोप है कि नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली साईं दीप्ति को स्कूल प्रशासन ने क्लास से बाहर निकाल दिया था जिसके वजह से वो शर्मसार महसूस कर रही थी.

घर लौटकर छात्रा ने अपनी बहन को इस घटना के बारे में बताया था.

बाद में उसका शव घर के ही एक पंखे से लटकता हुआ मिला.

साईं दीप्ति की बड़ी बहन का कहना है कि उसने स्कूल में बेइज्ज़त किए जाने के बारे में बताया था.

दीप्ति ने अपनी बहन से कहा था, फ़ीस न चुकाए जाने की वजह से अध्यापकों ने मेरी बाकी बच्चों के सामने बेइज्ज़ती की.

स्कूल में हुए इस दुर्व्यवहार की वजह से छात्रा बेहद परेशान और दुखी थी.

दीप्ति के पिता ऑटो चलाते हैं. परिवार आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रहा था जिस वजह से उसकी स्कूल की फ़ीस नहीं भरी जा सकी थी.

मलकागिरि पुलिस ने ज्योति हाई स्कूल के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया है.

भारत में शिक्षा का अधिकार क़ानून लागू है जिसके तहत चौदह साल तक के सभी बच्चों को मुफ्त शिक्षा का अधिकार है.

इसके अलावा निजी स्कूलों में भी 25 फ़ीसदी सीटें ग़रीब बच्चों के लिए आरक्षित हैं.

यही नहीं सरकार भी छात्रों को कई तरह स्कॉलरशिप और सुविधाएं देती है. बावजूद इस सब के छात्रा की ये आत्महत्या हमारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

फ़ीस वसूल करना स्कूलों का अधिकार है. लेकिन क्या वो इसके लिए छात्रों को सबके सामने बेइज्ज़त कर सकते हैं?

स्रोतः टाइम्स नाऊ


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