ख़बरें

एफ़जीएम की पीड़ा से गुज़रती हैं दाऊदी बोहरा महिलाएं

Poonam

February 6, 2018

SHARES

आज फ़ीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (एफ़जीएम या महिला जननांद विकृतिकरण) के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय दिवस है.

एक शोध के मुताबिक भारत में रहने वाले बोहरा समुदाय की 75 प्रतिशत महिलाओं का कहना है कि उनका एफ़जीएम हुआ है.

हालांकि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि भारत में एफ़जीएम को लेकर कोई डाटा मौजूद नहीं है.

हाल ही में किए गए एक शोध में  शामिल 94 महिलाओं में से 75 फ़ीसदी ने कहा है कि उन्होंने अपनी बेटी का एफ़जीएम करवाया है.

ये शोध एफ़जीएम के ख़िलाफ़ लामबंद बोहरा महिलाओं के सहयोग से करवाया गया है.

शोध में शामिल महिलाओं में से 97 प्रतिशत ने अपने बचपन के दौरान हुई इस प्रक्रिया को बेहद दर्दनाक अनुभव बताया है.

भारत में महिलाओं के जननांग के विकृतिकरण की ये प्रक्रिया शिया बोहरा समुदाय में प्रचलित है. इस समुदाय में इसे खफ़्ज़ कहा जाता है.

इस प्रक्रिया के तहत एक लड़की के सात साल का होने पर उसके जननांग के बाहरी हिस्से के काट कर हटा दिया जाता है.

सर्वे में शामिल तैंतीस प्रतिशत महिलाओं का मानना था कि एफ़जीएम की वजह से उनका सेक्स जीवन प्रभावित हुआ है.

जबक दस प्रतिशत का कहना था कि इसीक वजह से यूरीनरी ट्रेक्ट इंफ़ेक्शन भी होते रहते हैं.

महिलाओं का ये भी कहना था कि वो इस प्रक्रिया की वजह से शर्म, गुस्सा और अवसाद भी महसूस करती हैं.

एफ़जीएम के ख़िलाफ अभियान चला रहीं मासूमा रानालवी कहती हैं कि दुनियाभर में इसके ख़िलाफ़ अभियान चल रहा है.

रानालवी सवाल करती हैं कि भारत सरकार क्यों इस बारे में हमारे समुदाय की महिलाओं के हितों पर ध्यान नहीं दे रही है.

हालांकि इस प्रक्रिया का समर्थन करने वाली दाऊदी बोहरा महिलाएं इसे एक तरह का खतना बताती हैं और तर्क देती हैं इस दौरान जननांग का विकृतिकरण नहीं किया जाता है.


Contributors

Edited by :

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...