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वरिष्ठ सैन्य अधिकारी से संदिग्ध डाटा लीक में पूछताछ

तर्कसंगत

February 15, 2018

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एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने जबलपुर में तैनात एक लेफ्टिनेंट कर्नल के हनीट्रेप में फंसने की रिपोर्टों को खारिज किया है.

दरअसल दिल्ली के सैन्य अधिकारियों की एक टीम पूछताछ के लिए संदिग्ध अधिकारी को दिल्ली सेना मुख्यालय लेकर आई थी.

सेना की काउंटर इंटेलिजेंस और मिलिट्री इंटेलिजेंस इकाइयों ने भी अधिकारी के ठिकानों पर सर्च अभियान चलाया था.

इस घटनाक्रम के बाद जबलपुर में तैनात संबंधित लेफ्टिनेंट कर्नल के हनी ट्रेप में फंसने के कयास मीडिया रिपोर्टों में लगाए गए थे.

अब एक वरिष्ट सैन्य अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है कि ये रिपोर्टें कोरे कयास हैं.

अधिकारी ने कहा कि जांच चल रही है जिसका ब्यौरा सही समय पर सार्वजनिक कर दिया जाएगा.

संबंधित लेफ़्टिनेंट कर्नल के डिवाइस से ख़ुफ़िया डाटा लीक होने का शक़ होने के बाद सेना ने 12 फ़रवरी को पूरे घटनाक्रम की शुरुआती जांच शुरू कर दी थी.

अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि अधिकारी के डिवाइस से डाटा जानबूझकर भेजा गया है और या फिर भूलवश लीक हुआ है.

सेना ने पूरे घटनाक्रम के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी है. ऐसे में इसे लेकर कई तरह के कयास भी लगाए जा रहे हैं. कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि अधिकारी को हनीट्रैप कर लिया गया था. वहीं कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि उनकी भ्रष्टाचार के मामले में जांच चल रही है.

हाल ही में भारतीय एयरफोर्स के हेडक्वार्टर पर तैनात एक ग्रुप कैप्टन को हनीट्रैप में फंसने के बाद संवेदनशील जानकारियां लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

रिपोर्टों के मुताबिक अरुण मारवाह नाम के इस अधिकारी को फ़ेसबुक पर फ्रेंड बनी दो महिलाओं ने निजी चैट करने के बाद ब्लैकमेल किया था.

सेना अधिकारियों के हनीट्रैप में फंसने के कई मामले सामने आए हैं.

सेना ने इसे लेकर सख़्त नियम भी लागू किए हैं जिनकी अनदेखी करने वाले अधिकारी ही हनीट्रेप में फंस जाते हैं.

स्रोतः एएनआई, टाइम्स ऑफ़ इंडिया


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