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हादसे होते रहे, जानें बचाने के लिए आख़िरकार मुसलमानों ने हटा दी मस्जिद

तर्कसंगत

February 17, 2018

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भारत में धार्मिक स्थलों का सड़क की राह में आ जाना कोई नई बात नहीं है.

अकसर जब सड़क के रास्ते में धार्मिक स्थल आ जाते हैं तो लोगों की भावनाएं आहत करने के बजाए सड़क ही मोड़ दी जाती है.

कई बार ऐसा होता है कि सड़क मोड़ने की गुज़ाइश नहीं होती और धर्मस्थल भी अपनी जगह डटे रहते हैं. ऐसे में काम ही अटक जाता है.

सड़क निर्माण के ऐसे अटके हुए काम हादसों की वजह बन जाते हैं.

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भी ऐसा ही हो रहा था जहां एक निर्माणाधीन पुल के रास्ते में मस्जिद आ गई थी जिसकी वजह पुल का निर्माण अटका पड़ा था.

दरअसल संथावली गांव में रेलवे लाइन के ऊपर से पुल बनना था लेकिन यहां एक मस्जिद सड़क के रास्ते में थी.

लेकिन पुल न बन पाने की वजह से यहां हादसे भी होने लगे थे. स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक बीते सात सालों में यहां सत्तर से ज़्यादा सड़क हादसे हुए जिसमें कई लोगों की जान गई.

दरअसल निर्माणाधीन पुल से कोई गिर न जाए इसलिए पुल बना रही कंपनी ने यहां एक अस्थायी दीवार बना दी थी. दिन की रोशनी में तो ये दीवार दूर से दिखाई देती लेकिन रात के अंधेरे में कई बार वाहन चालक धोखा खा जाते और दीवार से टकरा जाते.

बावजूद इसके प्रशासन न ही मस्जिद को हटा पा रहा था और न ही पुल बन पा रहा था.

लेकिन लगातार होते हादसों ने स्थानीय मुस्लिम आबादी का नज़रिया बदल दिया और मुसलमानों ने ही मस्जिद को सड़क के रास्ते से हटाने का प्रस्ताव दे दिया.

स्थानीय प्रशासन ने मस्जिद की प्रबंधन समिति से अनुमति मिलते ही मस्जिद और उसके साथ लगे मदरसे को हटा दिया और पुल का निर्माण फिर से  शुरू कर दिया गया.

इसके एवज में मुआवजे के तौर पर 49 लाख रुपए भी मस्जिद की प्रबंधन समिति के खाते में प्रशासन की ओर से जमा कराए गए हैं.


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