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800 करोड़ का क़र्ज़ घोटाला, सीबीआई ने रोटोमैक कंपनी के मालिक पर एफ़आईआर दर्ज की

तर्कसंगत

February 19, 2018

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सीबीआई ने सोमवार को रोटोमैक पेन कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी पर 800 करोड़ रुपए का लोन न चुकाने के मामले में एफ़आईआर दर्ज कर ली है.

सीबीआई की कई टीमें कानपुर में कोठारी के कई ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाइयां भी कर रही हैं.

विक्रम कोठारी ने कई बैंकों से आठ सौ रुपए करोड़ रुपए का क़र्ज़ लिया है और चुकाया नहीं है.

वहीं पंजाब नेशनल बैंक में 11400 करोड़ रुपए के लोन घोटाले के सामने आने के बाद से सरकार पर गंभीर सवाल उठे हैं. इसके बाद ही सीबीआई ने ये कार्रवाई की है.

सीबीआई कोठारी, उनके बेटे और पत्नी से भी इस सिलसिले में पूछताछ कर रही है.

इससे पहले स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों में कहा गया था कि कोठारी देश छोड़कर फरार हो गए हैं. रविवार को कोठारी ने मीडीया के ज़रिए जारी बयान में कहा था कि वो देश में ही मौजूद हैं और भागे नहीं हैं.

बैंक ऑफ़ बड़ौदा की शिकायत पर सीबीआई ने पेन निर्माता कंपनी रोटोमैक पर मुक़दमा दर्ज किया है.

बैंक ने फरवरी 2017 में रोटोमैक को लोन ‘विलफुल डिफॉल्टर’ घोषित कर दिया था.

रोटोमैक ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसने अपनी तीन सौ करोड़ रुपए की संपत्तियां बैंक को पेश की थी लेकिन इसके बावजूद उसे विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया.

कंपनी को अदालत से अपने पक्ष में फैसला तो मिल गया था लेकिन वो क़र्ज़ चुकाने में  नाकाम ही रही थी.

रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी ने पांच सरकारी बैंकों से आठ सौ करोड़ रुपए से अधिक का क़र्ज़ लिया है.

इसमें इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज़ बैंक और यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया शामिल हैं.

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इन बैंकों ने विक्रम कोठारी को क़र्ज़ देते वक़्त नियमों की अनदेखी की है.

कोठारी ने यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया की मुंबई शाखा से 485 करोड़ रुपए और इलाहाबाद बैंक की कोलकाता शाखा से 352 करोड़ रुपए का क़र्ज़ लिया.

एक साल बीत जाने पर उन्होंने न कर्ज़ लौटाया और न ही ब्याज़ चुकाया.


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