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पटना में गाय के पेट से निकाली गई 80 किलो पॉलीथिन

तर्कसंगत

February 20, 2018

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पटना स्थित बिहार वेटेरीनरी कॉलेज में डॉक्टरों ने एक गाय का ऑपरेशन कर उसके पेट से 80 किलो प्लास्टिक कचरा निकाला है.

सर्जरी और रेडियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर ने छह साल की उम्र की गाय के पेट से ये पॉलीथिन कचरा निकाला है.

डॉक्टर जीडी सिंह ने कहा, “मेरे तेरह साल के करियर में ये पहली बार है जब किसी एक गाय के पेट से अस्सी किलो पॉलीथिन निकाली गई है.”

डॉ. सिंह के मुताबिक उन्हें सर्जरी करने में तीन घंटे से अधिक का समय लगा.

फिलहाल गाय को खुला छोड़ दिया गया है लेकिन अगले दस दिन उसके लिए बेहद अहम होंगे.

गायों का कचरा खाना आम बात है. आमतौर पर शहरी क्षेत्रों में पशु मालिक गायों को आवारा छोड़ देते हैं.

वो इन्हें दूहते तो हैं लेकिन इनके खाने का कोई इंतेज़ाम नहीं करते.

खाने के अभाव में गाये कूड़े के ढेर पर फेंके गए खाद्य पदार्थों को खाने के लिए मजबूर हो जाती हैं.

वो खाद्य पदार्थों के साथ उस पॉलीथिन को भी खा लेती हैं जिनमें रखकर उसे फेंका गया होता है.

शहरी क्षेत्र की गायों के पेट में प्लास्टिक कचरे का पहुंचना आम बात है.

डॉ. सिंह कहते हैं कि मालिकों के पशुओं को खुला छोड़ने के साथ-साथ आम लोग भी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.

वो कहते हैं कि लोगों को पॉलीथिन में रखकर खाद्य कचरा नहीं फेंकना चाहिए. पशु इसे खाद्य कचरे समेत चर जाते हैं.

डॉ. सिंह कहते हैं कि पॉलीथिन में कचरा फेंकने से पर्यावरण को होने वाले नुक़सान के साथ-साथ पशुओं को होने वाले नुक़सान के बारे में भी जागरुकता फैलाई जानी चाहिए.

गाय के मालिक दीपक कुमार ने स्थानीय अख़बार हिंदुस्तान को बताया है कि उनकी गाय के चारा खाना छोड़ दिया था. वो आमतौर पर गाय को चरने के लिए खुले में छोड़ दिया करते थे.

जब गाय ने बिलकुल खाना बंद कर दिया तब वो उसे लेकर अस्पताल पहुंचे थे.

भारत के शहरी क्षेत्रों में गायों का कूड़े के ढेर पर दिख जाना आम बात है.

यही नहीं ज़्यादातर खाद्य कचरे को भी प्लास्टिक की थैलियों में ही कूड़े फेंका जाता है. जिससे समस्या और ज़्यादा विकट होती जा रही है.

करुणा सोसायटी फॉर एनिमल एंड नेचर के एक शोध के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में ये समस्या और विकराल है.

रिपोर्ट में कहा गया था कि ये कचरा न सिर्फ़ गायों के पाचन तंत्र को प्रभावित करता है बल्कि उन्हें इसकी वजह से असहनीय पीड़ा भी होती है. साथ ही दूध उत्पादों के माध्यम से इसके दुष्प्रभाव लोगों तक भी पहुंच रहे हैं.

ये पहली बार नहीं है जब इतनी बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा गाय के पेट से निकाला गया है.

इससे पहले बीते साल मार्च में आंध्र प्रदेश में एक गाय के पेट से तीस किलो प्लास्टिक निकाली गई थी.

सितंबर 2016 में अहमदाबाद में एक गाय के पेट से सौ किलो प्लास्टिक कचरा निकाला गया था.


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