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हज़ार करोड़ का मानेसर ज़मीन घोटाला, सीबीआई ने भूपिंदर हुड्डा को अभियुक्त बनाया

तर्कसंगत

February 20, 2018

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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरौ (सीबीआई) ने कथित मानेसर ज़मीन घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा को मुख्य अभियुक्त बनाया है.

सीबीआई अदालत में पेश अपनी चार्जशी में जांच एजेंसी ने हुड्डा समेत राज्य के कई अधिकारियों की भूमिका का ब्यौरा दिया है.

इस ज़मीन घोटाले में सरकार को एक हज़ार करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ.

इंडियन एक्सप्रेस ने चार्जशीट के हवाले से बताया है कि घोटाले में कई बड़े अधिकारी भी शामिल हैं.

इसमें मुख्यमंत्री के तत्कालीन मुख्य सचिव मुरारी लाल तयाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव छतर सिंह, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के तत्कालीन निदेशक सुदीप सिंह ढिल्लो और इसी विभाग के कई अन्य अधिकारियों के नाम भी घोटाले की चार्जशीट में शामिल किए गए हैं.

जिस समय यह कथित घोटाला हुआ तब तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के पास टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग का कार्यभार भी था.

चार्जशीट में कहा गया है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने  अधिकारियों और निजी बिल्डरों से मिलकर ज़मीन अधिग्रहण करने की शर्तें बदल दी और बाद में अयोग्य अभ्यर्थियों को ज़मीन आवंटी कर दी गई जिससे निजी बिल्डरों को फ़ायदा पहुंचा और सार्वजनिक धन का नुक़सान हुआ.

सीबीआई ने कहा है कि जांच में मुख्यमंत्री की भूमिका संदिग्ध पाई गई है.

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि दिल्ली स्थित बिल्डर आदित्य बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड (एबीडब्ल्यू) और उसके निदेशक अतुल बंसल और उनकी सहायक कंपनियों ने 239 एकड़ ज़मीन ख़रीदने के लिए 169.07 करोड़ रुपए निवेश किए.

कंपनी ने इस ज़मीन पर बिक्री का लाइसेंस प्राप्त किया और इसे कथित तौर पर 397.36 करोड़ रुपए में बेच दिया.

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि एबीडब्ल्यू ने इस ज़मीन के निजी बिल्डरों को बेचकर 228 करोड़ रुपए का मुनाफ़ा कमाया.

चार्जशीट में कहा गया है कि एबीडब्ल्यू की ज़मीन का लाइसेंस प्राप्त करने की एप्लीकेशन तत्कालीन शर्तों और नियमों के आधार पर रद्द की जा सकती थी लेकिन बावजूद इसके उसे लाइसेंस दे दिया गया.

ये पूरा घोटाला ज़मीना का लैंड यूज़ बदलवाकर किया गया.

इस घोटाले में कई और कंपनियों, अधिकारियों और  बिल्डरों के नाम भी हैं.

स्रोतः इंडियन एक्सप्रेस 

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