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छत पर बनाया था विमान, अब महाराष्ट्र सरकार ने किया 35 हज़ार करोड़ का समझौता

तर्कसंगत

February 20, 2018

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महाराष्ट्र में अपने घर की छत पर छस सीटर विमान बनाने वाले पायलट के साथ महाराष्ट्र सरकार ने पैंतीस हज़ार करोड़ रुपए का समझौता किया है.

नागरिक उड्डयन महानिदेशायल (डीजीसीए) के थर्स्ट एयरक्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के विमान को उड़ान भरने की मंज़ूरी देने के कुछ महीने बाद ही ये क़रार किया गया है.

महाराष्ट्र सरकार ने अमोल यादव की इस कंपनी के साथ मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टेंडिंग साइन किया है जिसके तहत महाराष्ट्र के पालघर को विमान निर्माण के हब के तौर पर विकसित किया जाएगा.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पायलट अमोल यादव ने जो विमान बनाया है उसके अधिकारिक परीक्षण से पहले ही राज्य सरकार ने उनके साथ ये क़रार कर लिया है.

महाराष्ट्र इंडस्ट्रिलय डेवलपमेंट कार्पोरेशन और थर्स्ट एयरक्राफ़्ट के बीच जो एमओयू साइन किया गया है वो कऱीब पैंतीस हज़ार करोड़ रुपए का है.

सरकार यादव की फ़र्म को पालघर में 157 एकड़ ज़मीन देगी. ये जगह मुंबई से करीब 140 किलोमीटर दूर होगी.

वाणिज्यिक उड़ानों के पायलट रहे यादव का कहना है कि वो इस समझौते से बेहद ख़ुश हैं और उन्हें आगे आने वाली ज़िम्मेदारी का अहसास है.

उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा है कि उनकी कंपनी ने जो छह सीटर विमान बनाया है उसका अभी परीक्षण नहीं किया गया है.

वहीं उड़ानन क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस समझौते पर सवाल उठाए हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को ऐसे मौक़े प्रतिद्वंदिता के आधार पर देने चाहिए.

जो एमओयू साइन किया गया है उसके तहत अमोल यादव विमानों का उत्पादन देखेंगे जबकि खर्च सरकार उठाएगी.

यादव ने छह साल की मेहनत से छह सीटर विमान तैयार किया था. उनके विमान का पंजीकरण वीटी-एनएमडी के नाम से हुआ है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस के नामों के पहले अक्षर शामिल हैं.

यादव ने विमान बनाने के लिए अपना घर बेच दिया था और करीब चार करोड़ रुपए इस पर ख़र्च किए.

उन्होंने कांदिविली की एक इमारत की छत पर अपना देसी विमान तैयार किया.

इस विमान को साल 2016 में मेक इन इंडिया वीक के तहत प्रदर्शित भी किया गया था.

फिलहाल ये विमान एयरपोर्ट पर खड़ा है.

ये विमान अल्मूनियम से बना है और 10.8 फुट ऊंचा है. इसे रिटायर्ड एयरमार्शल मुरली सुंदरम की देखरेख में तैयार किया गया है. आईआईटी बांबे के प्रोफ़ेसरों ने भी इसमें मार्गदर्शन दिया है.

स्रोतः हिंदुस्तान टाइम्स


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