मेरी कहानी

मेरी कहानी : मेरी जिंदगी में लाइब्रेरी तो नहीं है लेकिन जिंदगी बनाने के लिए अच्छी किताबें जरूर है.

तर्कसंगत

February 23, 2018

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पुरुष राज उर्फ राकेश यूपी के रायबरेली के रहने वाले हैं. 48 वर्षीय राकेश फिलहाल मुंबई के अंधेरी इलाके में रहते हैं जहां वो किताबों को रेंट पर देने का काम करते हैं. 15 साल की उम्र में एक भयावह दुर्घटना में उन्होंने अपना बायां हाथ गंवा दिया. 15 अगस्त 1985 को अपने छोटे भाई के साथ राकेश आम तोड़ने गये थे क्योंकि छोटा भाई बार-बार आन खाने की गुजारिश कर रहा था. राकेश आम के पेड़ पर चढ़ तो गये लेकिन उपर से गुजरती हाई टेंशन वायर से वो अंजान थे.

दुर्भाग्यवश वो दो तारों के बीच में खडे़ होकर आम तोड़ने लगे तभी उनका बायां हाथ और सिर की बायीं तरफ का हिस्सा तारों से लग गया. उन्हें कुछ पता चलता की क्या हुआ तब तक वो बेसुध थे. होश आने के बाद उनके छोटे भाई ने ही इस घटना के बारे में उन्हें बताया. 3 दिनों तक वो पास के जिला अस्पताल में बेहोश रहे जहां डॉक्टर ने ज़हर फैलने के डर से बायें हाथ को काटने को कह दिया.

राकेश की तब तक शादी हो चुकी थी. दरअसल उनका बचपन में ही विवाह हो गया था लेकिन शादी के बाद पत्नि को साथ लेकर जाने वाला रस्म जिसे गौना कहते हैं नहीं हुआ था. इस दुर्घटना के बाद जब वो अपनी पत्नि से मिले तो बड़े कठोर दिल से कहा कि ‘तुम किसी और से शादी कर लो जो तुम्हारा अच्छे से ख्याल रख सके क्योंकि मैं तुम्हार ध्यान नहीं रख पाउंगा’.

पत्नि की जवाब सुनकर मैं हैरान हो गया, ऐसा लगा ये किसी हिन्दी सिनेमा का सीन हो. उसने कहा की ‘लड़की की शादी बस एक बार होती है और मैं सिर्फ आपकी बन कर रहूंगी’. राकेश की जिंदगी में उनकी पत्नि एक प्रेरणास्रोत रहीं, जिससे उन्होंने सारी कठिनाइयों का डट कर सामना किया. उनके 3 बच्चे हैं जिनमें एक की शादी भो हो गयी है.

शुरुआत में राकेश ने दिल्ली में आकर खेती का काम किया फिर वो बाद में मुंबई चले गये. इस बीच एक बार फिर वो एक गंभीर समस्या की चपेट में आ गये. उनका दिमागी संतुलन बिगड़ गया जिसकी वजह से वापस उन्हें अपने घर जाना पड़ा. 4-5 महीने बाद जब राकेश ठीक हुए तो फिर से उन्होंने दिल्ली का रुख किया जहां वो कृषि कार्य में लग गये लेकिन किस्मत उन्हें फिर से मुंबई ले आयी. यहां उन्होंने बुक रेंट पर देने का काम शुरू किया.

पिछले 15 सालों से वो इसी काम को कर रहै हैं. जब उनसे पूछा गया की यदी कोइ बुक वापस न करे तो आपको नुकसान होता होगा. राकेश ने कहा की मैं बुक देखकर पहले ही 100 से 300 रू. एडवांस ले लेता हूं और अबतक हर किताब कम से कम दो से तीन बार ग्राहकों के पास से वापस आ चुकी हैं. अब तो बस मुनाफा कमा रहा हूं.
इस काम को करते-करते वो अब किताबों की विकिपीडिया बन चुके हैं. सारी किताबों और उनके लेखक का नाम तो उनकी जुबान पर है. इतना ही नहीं वो आपके लिए किताबों कि लिस्ट भी तैयार कर सकते हैं आपकी पसंद के अनुसार बस आपको एक से दो बुक के नाम लेने की देर है. डॉ अब्दुल कलाम ने कहा था की “एक अच्छी किताब सौ दोस्तों के बराबर है लेकिन एक अच्छा दोस्त पूरी लाइब्रेरी के समान है”. राकेश की जिंदगी में लाइब्रेरी तो नहीं है लेकिन जिंदगी बनाने के लिए अच्छी किताबें जरूर है.

Story by- Nishant Kumar


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