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बेशर्म दिल्ली में बेबस तड़पती रही पत्नी, जेबकतरों ने की पति की हत्या

तर्कसंगत

February 28, 2018

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दिल्ली में पॉकेटमार अगर आपकी जेब काटने की कोशिश करें और आपको पता चल जाए तो विरोध न करें. अपनी जेब कट जाने दें. क्योंकि विरोध करना जानलेवा साबित हो सकता है.

हम ये सलाह आपको इसलिए दे रहे हैं क्योंकि आपकी जान आपकी जेब में रखे पैसों या मोबाइल से कहीं ज़्यादा क़ीमती है.

विरोध करने की सलाह हम इसलिए नहीं दे रहे हैं क्योंकि दिल्ली में हाल के दिनों में जेब कटने का विरोध करने पर हत्या तक की वारदातें हो चुकी हैं.

हमारी रगों में जम गए ख़ून का सबूत देने वाली ऐसी ही एक वारदात दिल्ली के चर्चित स्थलों में से एक प्रगति मैदान के सामने हुई.

25 फ़रवरी को अमरजीत अपनी पत्नी मंजू और चार साल के बेटे के साथ चिड़ियाघर घूमने के बाद बदरपुर से मोरी गेट टर्मिनल के बीच चलने वाली डीटीसी बस से लौट रहे थे.

डीटीसी की रूट संख्या 405 की बस में सफर कर रहे अमरजीत की जेब से जेबकतरों ने मोबाइल निकाल लिया. ये क़रतूत उनकी पत्नी मंजू ने देख ली. उन्होंने दौड़कर एक जेबकतरे को पकड़ लिया.

जेबकतरे के तीन साथियों ने अपने साथी को मंजू की पकड़ से छुड़ाने के लिए उन पर चाकू से हमला कर दिया. घायल होने के बाद मंजू ने पकड़ ढीली नहीं की और लड़ती रहीं. अमरजीत जब अपनी पत्नी की मदद के लिए दौड़े तो एक जेब कतरे ने उनकी छाती में चाकू घोंप दिया. इस हमले ने अमरजीत की जान ले ली.

लेकिन जिस दौरान ये सब हो रहा था कोई भी राहगीर या चश्मदीद मदद के लिए आगे नहीं आया. जब तक लोग आगे आते दो हमलावर फरार हो चुके थे. दो हमलावरों को भीड़ ने दौड़ाकर पकड़ लिया.

पुलिस का कहना है कि दिल्ली के शाहदरा इलाक़े में छापेमारी के बाद एक और हमलावर जेबकतरे को गिरफ़्तार कर लिया गया है जबकि एक फरार है. पुलिस ने सूरज, सुमित और अजीत को गिरफ़्तार किया है जिनकी उम्र 20 से 25 साल के बीच है. फ़रार जेबकतरे के पास अमरजीत का मोबाइल फ़ोन है.

पुलिस ने इन जेबकतरों पर क़त्ल और क़त्ल की कोशिश का मुक़दमा दर्ज किया है.

मारे गए अमरजीत मूल रूप से यूपी के रहने वाले हैं और दिल्ली में किराए के मकान में अपनी पत्नी के साथ रहते थे. वो मज़दूरी किया करते थे. अभी तक पुलिस या सरकार की ओर से उनके परिवार की कोई मदद नहीं की गई है.

बीते साल नवंबर में डीटीसी की ही एक बस में मोबाइल चुराने का विरोध करने पर एक छात्र की भी चाकू मार कर हत्या कर दी गई थी.

दिल्ली की बसों में इस तरह के अपराध की ख़बरें आती रहती हैं. लेकिन इन्हें रोकने की दिशा में कोई ठोस क़दम उठाए जाते नहीं दिखते हैं. इसका एक कारण ये भी है कि डीटीसी में सफर करने वाले लोग आमतौर पर गरीब होते हैं जिनकी सुरक्षा सरकार की चिंता से बाहर दिखती है.
दिल्ली कितनी बेदर्द और बेरहम हो सकती है


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