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महिला दिवस के अगले ही दिन प्रेम प्रस्ताव ठुकराने पर छात्रा की हत्या

Poonam

March 10, 2018

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आठ मार्च को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया. इस दिन प्रशासन और सरकारों ने समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए उठाए गए क़दमों का ब्यौरा दिया.

दुनियाभर में हुए कार्यक्रमों में महिला सुरक्षा के सवाल पर चर्चा की गई और इस दिशा में क्या-क्या किया जा रहा है ये बताया गया.

लेकिन महिला दिवस के अगले ही दिन चैन्नई में हुई एक घटना ने फिर ये जता दिया है कि महिलाओं के लिए सुरक्षित समाज बनाने के लिए अभी हमें बहुत काम करना होगा.

चैन्नई के एक कॉलेज के गेट पर ही एक 19 वर्षीय छात्रा की गला काटकर हत्याकर दी गई. छात्रा ने हत्यारे के प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.

एम अश्विनी शहर के मीनाक्षी एकेडमी ऑफ़ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च में बी कॉम की छात्रा थी.

 

वह शुक्रवार को अपनी क्लास पूरी करने के बाद बस स्टैंड की ओर जा रही थी जब अलागेसन नाम के 26 साल के अभियुक्त ने उस पर चाकू से वार किया.

छात्रा का गला कट गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई.

पुलिस जांच में पता चला है कि अश्विनी ने अलागेसन के प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. अलागेसन काफ़ी समय से उसका पीछा कर रहा था.

अश्विनी के परिजनों ने पिछले महीने ही अलागेसन के ख़िलाफ़ पुलिस को शिकायत भी दी थी. शिकायत के बाद अलागेसन को हिरासत में भी लिया गया था. अश्विनी ने कुछ दिनों के लिए कॉलेज जाना भी छोड़ दिया था.

हालांकि अभियुक्त को ज़मानत मिल गई और इसी बीच छात्रा ने फिर से कॉलेज जाना शुरू कर दिया.

शुक्रवार को दिनदहाड़े छात्रा की हत्याक दी गई.

अश्विनी की हत्या दर्शाती है कि आज भी हमारे समाज में पुरुष महिलाओं को उपभोग की वस्तु की तरह देखते हैं और उसका अपनी मर्ज़ी से इस्तेमाल करना चाहते हैं.

भारतीय संविधान ने अश्विनी को सम्मान से जीने का अधिकार दिया था. उसे अपनी मर्ज़ी से अपना प्रेमी या जीवनसाथी चुनने का भी अधिकार था.

लेकिन अलागेसन उस पर अपनी मर्ज़ी थोपना चाहता था और उसे अश्विनी का ना नागवार गुज़री.

एक बेटी के क़त्ल की ये वारदात अपने आप में अकेली या अनूठी नहीं है.

ऐसी ख़बरें आए दिन देश के किसी न किसी कोने से आती रहती हैं.

केरल हो, तमिलनाडु हो या उत्तर प्रदेश या मध्य प्रदेश, स्थानीय मीडिया में आमतौर पर हर दिन इस तरह की किसी न किसी घटना की ख़बर होती है.

सवाल ये भी उठता है कि इकतरफ़ा इश्क़ की क़ीमत हर बार लड़की को ही क्यों चुकानी पड़ती है. इसका जवाब शायद ये है कि आज भी हमारे समाज में महिलाएं एक कमज़ोर स्थिति में हैं और उन्हें पुरुषों की बराबरी में आने के लिए अभी भी लंबा सफर तय करना होगा.

महिलाओं को बराबरी और सुरक्षा हासिल करने के इस सफर में समाज और सरकार के साथ की ज़रूरत है.

वरना कल फिर अख़बार में किसी अश्विनी के क़त्ल की ख़बर होगी और शाम तक अख़बार के रद्दी बनने के साथ ही वो ख़बर भी हमारे ज़ेहन से ग़ायब हो जाएगी.


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