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उत्तर प्रदेशः सिर्फ़ सरकारी अस्पतालों में ही इलाज करा सकेंगे सरकारी लोग

तर्कसंगत

March 10, 2018

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सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बेहद अहम फ़ैसला दिया है.

अदालत ने कहा है कि सभी सरकारी कर्मचारी और सरकार से वेतन पाने वाले लोग चिकित्सा भत्ते के तहत सिर्फ़ सरकारी अस्पतालों में ही इलाज करा सकेंगे.

हाई कोर्ट ने सरकार को सरकारी अस्पतालों में खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरने का भी आदेश दिया है.

हाई कोर्ट ने सभी सरकारी अस्पतालों की ऑडिट कैग से कराने और ज़िलों में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रेक्टिस रोकने के लिए विजिलेंस टीमें गठित करने का आदेश भी दिया है.

स्थानीय अख़बार अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस अजीत कुमार ने इलाहाबाद की स्नेहलता और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि यदि सराकरी अधिकारी या कर्मचारी निजी अस्पतालों में इलाज कराता है तो उसका भुगतान सरकारी खजाने से नहीं किया जाए.

अदालत ने प्रदेश सरकार से कहा है कि सभी सरकारी अस्पतालों और ट्रामा सेंटरों में खाली पड़े पचास फीसदी पद अगले चार महीनों में भर दिए जाने चाहिए.

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि सरकारी कर्मचारियों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने की अनुमति तब ही दी जानी चाहिए जब सराकरी अस्पतालों में इलाज की सुविधा उपलब्ध ही न हो.

अदालत ने ये भी कहा है कि सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि किसी ग़रीब व्यक्ति को ऐसी बीमारी हो तो उसका इलाज भी निजी अस्पताल में हो सके.

अदालत ने सभी सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के आदेश भी दिए हैं.

अदालत ने प्रदेश के मुख्य सचिव को 25 सितंबर तक अनुपालन रिपोर्ट अदालत में पेश करने का आदेश दिया है.

यही नहीं प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों से वसूली करने का आदेश भी दिया गया है.

उत्तर प्रेदश हाई कोर्ट का ये फ़ैसला अगर लागू किया जा सका तो ये प्रदेश में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की दिशा में एक अहम क़दम साबित होगा.

प्रदेश के सरकारी अस्पताल न सिर्फ़ इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में बदहाल स्थिति में है बल्कि डॉक्टरों की भी भारी कमी से जूझ रहे हैं.

ज़िला स्तरीय सरकारी अस्पतालों में आमतौर पर आधे के लगभग डॉक्टरों के पद खाली हैं.

यदि ज़िले के बड़े अधिकारी और सरकारी कर्मचारी सरकारी अस्पतालों में इलाज कराएंगे तो इससे चिकित्सीय सेवाएं बेहतर ही होने की उम्मीद हैं.


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