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सेना में ऑफिसर बना कैब ड्राइवर

Poonam

March 12, 2018

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लेफ्टिनेंट ओम पैथाने एक ऐसा नाम जो हर किसी इंसान के लिए प्रेरणा की एक मिसाल है. अगर किसी भी टैक्सी ड्राइवर को देखकर आप ये सोच रहे हों की ज़िंदगी में इसके लिए सबकुछ कितना मुश्किल है और ये शायद इस काम के अलावा कुछ कर नहीं पायेगा तो आप गलत हैं. लेफ्टिनेंट ओम पैथाने महाराष्ट्र के पुणे निवासी एक ओला कैब ड्राइवर से अब आर्मी ऑफिसर के रूप में देश की रक्षा की सेवा करेंगे.

लेफ्टिनेंट ओम पैथाने दिखते भले ही साधारण हों मगर एक असाधारण ज़िंदगी से इस मुकाम पर पहुंचे हैं. और अब उनके कंधे पर सजे सितारे और नाम से जुड़ा लेफ्टिनेंट न केवल उनका सीना चौड़ा कर रहा है बल्कि उनके परिवार का सिर भी उंचा कर दिया.

तंगी के जीवन में हौसले को हथियार बना कर, अपने हुनर और हिम्मत के बूते उन्होंने वो मुकाम पा लिया है जिसका ख्वाब हर हिंदुस्तानी युवा देखता है. लेफ्टिनेंट ओम मिसाल हैं कि ख्वाब महज इरादों की लकीरें खींच कर नहीं पूरे होते बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए लगन की एक नई लकीर खींचनी होती है.

सोशल मीडिया पर ओम सुर्खियों में हैं. कैब ड्राईवर से अफसर बनने की दास्तां लोगों को सबक दे रही है. लेकिन ओम के लिए सहज नहीं था. हादसे में पिता के पैर गंवाने के बाद ओम जिंदगी की गाड़ी चलाने के लिए कैब की स्टेयरिंग थाम ली. मुकद्दर रास्ते तय कर चुका था और एक रोज ओम रिटायर्ड कर्नल के साथ सफर पर निकले तो मंजिल भी दिख गई.

ओम की मां की खुशी का आलम ये है कि आंसू छलक जाते हैं बेटे की कामयाबी देखकर. ओम के भाई आदिनाथ ने बताया, ‘हमारे परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी. वह पढ़ाई और ड्राइविंग दोनों को मैनेज करते थे. मेरे पिता भी 25 साल तक ड्राइवर पेशे से जुड़े रहे और वह नहीं चाहते थे कि हम इस पेशे से जुड़े इसलिए उन्होंने हमारी पढ़ाई पर जोर दिया. ओम पिता से छिपते-छिपाते कैब चलाते थे.’ ओम ने 2016 सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के लिए परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में इसे पास कर लिया. इसके बाद ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकैडमी (ओटीए) ज्वॉइन की.

ज़िंदगी की मुश्किलों में ख्वाबों का यूं आसान हो जाना ही चमत्कार है और हिंदुस्तान में ऐसे चमत्कारों के नाम भी कम नहीं है. इस बार चर्चा ओम की है जो वाकई में सारे हिंदुस्तानियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं.

PC- NBT


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