मेरी कहानी

मेरी कहानीः बहन ने ही सबकुछ लूट लिया, अब मेरी मुस्कान से भी आंसू टपकते हैं

तर्कसंगत

March 19, 2018

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उस दिन मैं किसी पागल औरत की तरह अपने उजाड़ तालाब में तैरती रही थी. किसी को नहीं पता था कि मेरे भीतर क्या चल रहा है. मेरा सारा जीवन मेरे सीने में जलकर ख़ाक हो रहा था.

मैंने अपने ही बिस्तर में उन दोनों को एक साथ देख लिया था. मैं आपको गहरे और जला कर रख देने वाले दर्द को नहीं समझा सकती अगर आपने अपने जीवनसाथी का धोखा नहीं सहा है, वो जीवनसाथी जिस पर आपने सबसे ज़्यादा भरोसा किया और जिसके साथ आपने किसी भी परिस्थिति में  अपना सारा जीवन बिताने का वादा किया.

मेरे पति ने मुझे धोखा दिया, लेकिन उसने मुझे मेरे ख़ून के साथ ही मिलकर धोखा दिया, मेरी वो बहन जिसे में सारी उम्र से अपनी बेटी समझकर पाल रही थी.

मैंने कभी बुरे सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरी अपनी बहन मेरे साथ ऐसा करेगी. वो बहन जो मां के मरने के बाद से ही मेरे साथ रह रही थी.

मेरी इकलौती बहन जिसे में अपने बच्चे की तरह प्यार करती थी, उसने ही मेरा सबकुछ छीन लिया. उसे मेरे ही पति से प्यार हो गया और मेरा नौ साल की शादीशुदा ज़िंदगी बर्बाद हो गई, मेरा भविष्य बर्बाद हो गया, मेरे सपने उजड़ गए, भरोसा टूट गया. हर वो आस टूट गई जिसे मैं एक इंसान के तौर पर दोबारा कभी नहीं जोड़ पाउंगी.

मेरे परिवार ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो प्यार में पागल थी. कोई उसे नहीं समझा पाया. मेरे पिता ने उसे बुरी तरह मारा पीटा भी. घर में बंद कर दिया लेकिन वो वहां से भागकर मेरे पति के पास आ गई.

मैं उससे कुछ नहीं कह सकती. वो मेरी ही तो बच्ची थी, मेरी ही बहन थी. इस स्थिति को स्वीकार करना मेरे लिए बहुत मुश्किल था. हालात को आसान करने के लिए मैंने कई बार अपनी जान लेने की कोशिश की. मैं जान लेने के कई तरीक़े तलाश रही थी लेकिन अपने बेटे की वजह से कुछ कर नहीं पायी. या शायद मैं बहुत बहादुर नहीं थी.

I spent that whole afternoon swimming in our abandoned pond like a crazy woman. No one knew what was happening inside…

Posted by GMB Akash on Monday, 12 March 2018

मैं अपनी बहन को शुभकामनाएं देकर अपने गांव से भाग आई और फिर कभी नहीं लौटी. पिछले साल अचानक एक रात मैंने घर छोड़ दिया बिना ये सोचे की मैं कहां जाउंगी या अपने चार साल के बेटे के साथ कैसे रहूंगी.

मैं ज़िंदा हूं. लेकिन मेरे भीतर सबकुछ मर गया है. मेरी आत्मा, मेरा प्यार, मेरा हर एक सपना मेरा हर एक विश्वास. मुझे अब किसी पर विश्वास नहीं है. मैं बस बाहर से ज़िंदा दिखती हूं. मैं हंसना भूल गईं हूं. अब तो हंसती भी हूं तो लगता है कि रो रही हूं- हसीना अख़्तर


Contributors

Edited by : Vibhansu

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