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मोसुल में लापता 39 भारतीयों की मौत की पुष्टि, परिजनों में ग़ुस्सा

तर्कसंगत

March 20, 2018

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भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में बताया है कि इराक़ के शहर मोसुल में लापता हुए 39 भारतीयों की मौत हो गई है.

इराक़ के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसुल पर साल 2015 में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ने क़ब्ज़ा कर लिया था.

इस दौरान 40 भारतीय इस्लामिक स्टेट के क़ब्ज़े में आ गए थे. इनमें से एक व्यक्ति स्वयं को बांग्लादेशी मुसलमान बताकर बच निकला था जबकि 39 की हत्या इस्लामिक स्टेट ने गोली मारकर कर दी थी.

इराक़ से बचकर भारत पहुंचे हरजीत मसीह नाम के व्यक्ति ने तब ही सभी भारतीयों के मारे जाना का दावा किया था जिसे भारत सरकार ने ख़ारिज कर दिया था.

इन भारतीयों के परिवारों को अब तक ये पता नहीं था कि उनके साथ क्या हुआ है.

संसद में जानकारी देने से पहले तक कहा जाता रहा था कि सरकार उन्हें वापस लाने की कोशिश कर रही है.

सुषमा स्वराज ने संसद में कहा है कि डीएने सबूतों के आधार पर भारतीयों की मौत की पुष्टि हुई है.

अब तक ये जानकारी मारे गए लोगों के परिजनों को न देने को लेकर विदेश मंत्री की आलोचना भी हो रही है.

मारे गए भारतीय नागरिक काम की तलाश में इराक़ गए थे. इनमें 31 पंजाब के हैं, चार हिमाचल प्रदेश के और बाकी बिहार और पश्चिम बंगाल से थे.

ये सभी लोग तारिक-नूर-अल-हुदा नाम की कंपनी में काम करते थे.

मारे गए लोगों के परिजनों ने साल 2017 में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाक़ात भी की थी तब सरकार ने उन्हें वापस ज़िंदा लाने का भरोसा दिया था.

अब सभी की मौत की ख़बर आने के बाद परिजनों में ग़ुस्सा है. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार से मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवज़ा देने के लिए कहा है.

तस्वीरः बीबीसी हिंदी


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