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मंत्री ने संसद को बताया, भारत में हर घंटे एक किसान करता है आत्महत्या

तर्कसंगत

March 24, 2018

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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरौ के ताज़ा आंकड़ें के मुताबिक साल 2016 में देशभर में 11370 किसानों ने आत्महत्या की थी.

ये जानकारी पंचायत राज मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने संसद में दी है.

वहीं साल 2017 में महाराष्ट्र में 400 किसानों ने आत्महत्या की थी.

महाराष्ट्र में साल 2014 में 1982, 2015 में 3228  और 2016 में 3052 किसानों ने आत्महत्या की थी.

कर्नाटक में भी किसानों की आत्महत्या में बढ़ौत्तरी हुई है. ये संख्या साल 2015 में 1569 थी जो 2016 में बढ़कर 2079 हो गई.

सरकारी आंकड़े के मुताबिक साल 2016 में छत्तीसगढ़ में 682, गुजरात में 408 और पंजाब में 471 किसानों ने आत्महत्या की थी.

आश्चर्यजनक रूप से बिहार और पश्चिम बंगाल में साल 2016 में किसी भी किसान की आत्महत्या का मामला आंकड़ों में दर्ज नहीं हुआ.

किसानों के मुद्दों पर रिपोर्टें लिखने वाले चर्चित पत्रकार पी साईंनाथ का कहना है कि 1995 से 2013 के बीच में देशभर में तीन लाख से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं.

पी साईंनाथ के मुताबिक केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से किसानों की आत्महत्याओं के मामले बढ़े हैं.

केंद्र और राज्य सरकारें किसानों के हित में कई बड़ी योजनाएं लाने के वादे करती रही हैं. उत्तर प्रदेश  और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में किसानों के क़र्ज़ भी माफ़ किए गए हैं बावजूद इसके किसानों की हालत में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है.

सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद देशभर में प्रत्येक घंटे एक किसान आत्महत्या कर लेता है.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरौ की रिपोर्ट के मुताबिक क़र्ज़ न चुका पाना आत्महत्या की सबसे बड़ी वजह है.

किसान क़र्ज़माफ़ी, बिजली के बिलों में कटौती, फसलों के सही दाम और दूध के दाम बढ़ाए जानें की मांग करते रहे हैं.

मौसम की मार, सूखा और क़र्ज़ के दुष्चक्र के अलावा किसानों पर नोटबंदी की मार भी पड़ी है.

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि साल 2016 में लागू की गई नोटबंदी का कृषि क्षेत्र में बेहद नकारात्मक असर पड़ा है.


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