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प्रेरणादायक: एक ऐसा रिक्शा चालक जिसने बनवा डाले 9 विद्यालय

Poonam

March 29, 2018

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प्रधानमंत्री मोदी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में हमेशा ऐसे लोगों का उल्लेख करते हैं जिन्होंने समाज सुधार में सराहनीय काम किया है. बीते रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 42वें मन की बात में असम के रहने वाले 82 वर्षीय अहमद अली का जिक्र किया जिन्होंने अपने निजी खर्चे से गरीब बच्चों के लिए 9 स्कूल बनवाए.

अहमद अली असम के करीमगंज में रिक्शा चलाने का काम करते हैं और उन्होंने पाथेरकंडी के मधूरभंद गांव में अपने निजी खर्च से उस इलाके में 9 स्कूल खोल दिया. प्रधानमंत्री के मन की बात में उनका जिक्र होने से उनके पूरे गांव में खुशी का माहौल है. उनका गांव बांग्लादेश के बॉर्डर से सटा हुआ है.

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में क्या कहा

जब मुझे आपके पत्रों में पढ़ने को मिला कि कैसे असम के करीमगंज के एक रिक्शा चालक अहमद अली ने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर ग़रीब बच्चों के लिए नौ स्कूल बनवाए हैं. तब मुझे इस देश की अदम्य इच्छाशक्ति के दर्शन होते हैं. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं असम के करीमगंज जिले के पाथेरकंडी सर्कल के मधुरबंद गांव के रिक्शा चालक अहमद अली के बारें में, जो खुद तो गरीबी के कारण पढ़ नहीं सके लेकिन उन्होंने यह तय किया की अब वह अपने गांव के किसी भी बच्चे को अशिक्षित नहीं रहने देंगे. पिछले चार दशकों में अहमद ने 9 स्कूलों की स्थापना की है जिसमें से तीन प्राथमिक विद्यालय, पांच मध्य अंग्रेजी विद्यालय और एक उच्च विद्यालय शामिल है.

कौन हैं अहमद अली
अहमद अली करीमगंज जिले के पाथेरकंडी सर्कल के मधुरबंद गांव के निवासी हैं. गरीबी के कारण वह पढ़ाई नहीं कर सके. जिसके बाद उन्होंने तय किया कि वे अपने इलाके के गरीब बच्चों की पढ़ाई पूरी करने में मदद रखेंगे। फिर अहमद अली ने रिक्शा चलाकर और अपनी जमीन बेचकर स्कूल खोलने की कसम खाई.

अपने सपने पूरे करने के लिए अली अहमद को जमीन भी बेचनी पड़ी. 1978 में उन्होंने अपनी जमीन का एक छोटा-सा टुकड़ा बेचने का निर्णय किया और गांववालों से भी पैसे जुटाए. इसके बाद एक प्राथमिक विद्यालय खोलने में सफलता हासिल की. उनके गांव-मोहल्ले के बच्चों की शिक्षा के लिए यह स्कूल बहुत उपयोगी रहा. लेकिन उन्होंने देखा कि आसपास के कई दूसरे इलाके हैं, जहां और स्कूलों की जरूरत है. फिर उन इलाकों में भी स्कूल स्थापित करने के लिए उन्होंने प्रयास शुरू कर दिए. अब तक वे नौ विद्यालय खोल चुके हैं और अभी एक और विद्यालय खोलने का उनका सपना है. स्कूल के बाद वे कॉलेज भी खोलना चाहते हैं.

उनका कहना है कि वे जीवनपर्यंत शिक्षा की रौशनी जलाना चाहते हैं. तर्कसंगत इनके जज्बे को सलाम करता है.


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