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दिल्लीः निजी स्कूल में बेटे को दाख़िला दिलाने के लिए ग़रीब बना व्यापारी, गिरफ़्तार

तर्कसंगत

April 8, 2018

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दिल्ली में एक व्यापारी पिता अपने बेटे का दाख़िला निजी स्कूल में कराने के लिए ‘ग़रीब’ बन गया.

ये कहानी ऐसी ही है जैसी बॉलीवुड फ़िल्म ‘हिंदी मीडियम’ की है जिसमें दिल्ली का एक व्यापारी दंपती अपनी बेटी का दाख़िला निजी स्कूल में कराने के लिए झुग्गी झोपड़ी में रहने लगते हैं.

दरअसल शिक्षा का अधिकार क़ानून के तहत निजी स्कूलों में ग़रीब बच्चों के लिए आरक्षण होता है.

दिल्ली में सामने आए इस मामले से पता चलता है कि ग़रीबों के इस आरक्षण पर अमीरों की नज़र है.

गौरव गोयल नाम के व्यापारी ने अपना पता संजय कैंप झुग्गी झोपड़ी को दिखाया और आमदनी को सालाना 67 हज़ार रुपए से कम बताया.

ये सब साबित करने के लिए उन्होंने फ़र्ज़ी दस्तावेज़ तैयार करवाए.

यही नहीं उन्होंने फ़र्ज़ी वोटर कार्ड और अपने बच्चे के लिए फ़र्ज़ी जन्म प्रमाण पत्र भी हासिल किया.

उन्होंने स्कूल में बताया था कि वो एक एमआरआई सेंटर में काम करते हैं.

गौरव गोयल ने फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के ज़रिए अपने बेटे का दाख़िला चाणक्यपुरी के संस्कृति स्कूल में साल 2013 में कराया था.

लेकिन ये मामला इस साल तब खुला जब गौरव ने अपने दूसरे बेटे के दाख़िले की अर्ज़ी सिबलिंग कोटा के तहत दी और स्कूल को बताया कि बीते सालों में उनकी आर्थिक हालत में सुधार हुआ है.

उनके बड़े बेटे के दाख़िले के दौरान दिए गए दस्तावेज़ों की जांच करते हुए स्कूल प्रशासन को भारी गड़बड़ियां लगीं और उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी.

पुलिस अब ये पता लगाने में जुटी है कि गोयल ने फ़र्ज़ी दस्तावेज़ कैसे हासिल किए.

पुलिस जांच में पता चला है कि गोयल का अपना एमआरआई सेंटर है और वो दालों की बिक्री का पारिवारिक काम भी संभालते हैं. वो अब तक बीस देशों से अधिक की यात्राएं कर चुके हैं.

स्कूल ने अब गोयल के बेटो को भी स्कूल से निकाल दिया है. पुलिस ने गोयल को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है.


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