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इंदौर हर बार कैसे बन जाता है सबसे साफ़ शहर?

तर्कसंगत

May 17, 2018

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मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहा जाने वाले इंदौर एक बार फिर से देश का सबसे साफ़ शहर बन गया है.

पिछले साल हुए सर्वे में भी इंदौर को यही स्थान प्राप्त था. मध्य प्रदेश की ही राजधानी भोपाल इस बार भी दूसरे नंबर पर ही है.

इंदौर में ऐसी क्या बात है कि ये शहर भारत के अन्य शहरों को पछाड़कर सबसे साफ़ शहर बन गया है?

बुधवार को भारत सरकार के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने इसी साल 4206 शहरी क्षेत्रों में किए गए सर्वेक्षण में इंदौर को सबसे स्वच्छ शहर पाया है.

इंदौर में जब नगरपालिका के ट्रक कूड़ा इकट्ठा करने निकलते हैं तो उनसे गीत बजते हैं. ये शहर के स्वच्छता गीत हैं.

इंदौर नगर निगम ने गायक शान की आवाज़ में तीन गीत रिकॉर्ड करवाए हैं. इनमें से एक की लाइनें हैं, ‘स्वच्छता आदत है, स्वच्छता उत्सव है…’

ये गीत सिर्फ़ ट्रकों से ही नहीं बजते हैं बल्कि शहर की नगर पालिका के अधिकारियों को फ़ोन पर कॉलर ट्यून और रिंग टोन भी यही गीत हैं.

इंदौर नगर निगम का दावा है कि उसने कूड़े के वर्गीकरण (गीला और सूखा कूड़ा) के मामले में सौ प्रतिशत सफलता हासिल कर लिया है. यानी शहर में गीला कूड़ा अलग और सूखा कूड़ा अलग इकट्ठा किया जाता है.

इंदौर के नागरिक क्षेत्रों से दिन में एक बार और ओद्योगित क्षेत्रों से दिन में दो बार कूड़ा इकट्ठा किया जाता है.

यहां के सफ़ाईकर्मचारी रात में शहर की सड़कों को साफ़ करते हैं. इनमें शहर की नाइटलाइफ़ के लिए मशहूर सराफ़ा बाज़ार भी शामिल है.

इंदौर नगर निगम में कुल दस हज़ार अधिकारी और कर्मचारी हैं. शहर की स्वच्छता का श्रेय इन कर्मचारियों  के साथ साथ नागरिकों को भी जाता है जो स्वच्छता अभियान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं.

बीते कुछ सालों में इंदौर ने चार लाख से अधिक लोगों ने स्वच्छता की क़सम खाई है.

बीते साल दिसंबर से नगर निगम ने शहर में थूकने, खुले में पेशाब करने या कूड़ा इधर उधर फेंकने पर ढाई से लेकर पांच सौ रुपए तक का जुर्माना लगाना शुरू किया था.

यही नहीं शहर में लगातार गंदगी फैलाने वाले लोगों को रेडियो और अख़बारों में बदनाम भी किया जाता है. शहर की मेयर इस क़दम का भी बचाव करती हैं.

मेयर मालिनी गौड़ ने अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘आदतन गंदगी करने वालों पर अन्य तरीके प्रभावी नहीं रहे हैं. हमें उम्मीद है कि सार्वजनिक रूप से बदनाम करने का ये तरीका कारगर साबित होगा.’

कई बार तो मालिनी गौड़ ने स्वयं स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों का चालान काटा है.

लेकिन इंदौर की स्वच्छता का राज़ सिर्फ़ ये ही नहीं है. यहां कचरा बीनने वाले एक हज़ार लोगों को काम पर भी लगाया गया है.  पार्कों, बाग़ों, होटलों के बार और मैरिज हॉलों के बाहर भी कूड़े को रिसायकिल करने वाली यूनिट स्थापित की गई हैं.

इस सबके अलावा जो सबसे ख़ास बात है वो है लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना.

इंदौर के लोग साफ़सफ़ाई के प्रति जागरूक नज़र आते हैं और नगर निगम के तमाम प्रयासों में सहयोग करते हैं. इस सबसे के सबसे साफ़ शहर होने की पीछे सबसे बड़ा हाथ इंदौरवासियों का ही है.

स्रोतः इंडियन एक्सप्रेस, तस्वीरः हिंदुस्तान टाइम्स

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