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बूंद-बूंद पानी को क्यों तरस रहा है शिमला?

तर्कसंगत

June 1, 2018

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हिमाचल प्रदेश की राजधानी और भारत के चर्चित पर्यटन स्थलों में से एक शिमला इस समय अभूतपूर्व जल संकट से गुज़र रही है.

हालात ऐसे हो गए हैं कि शहर के प्रशासन को पर्यटनों से यहां न आने की अपील की गई है.

पानी की किल्लत के चलते होटलों को पर्यटकों की बुकिंग रद्द करनी पड़ रही है.

इस अभूतपूर्व जल संकट के बीच हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अचानक रात में जल संकट का हाल जानने पहुंचे.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल इस समय शिलमा के जल संकट को लेकर दायर याचिका की सुनवाई कर रहे हैं.

संजय करोल बुधवार रात को अचानक शिमला नगर निगम के चार कंट्रोल रूम में हालात का जायज़ा लेने पहुंचे.

शिमला के डिप्टी कमिश्नर अमित कश्यप और नगर निगम आयुक्त रोहित जामवाल के साथ वो पूरी रात कंट्रोल रूम की निगरानी करते रहे.

शिमला में हालात ऐसे हो गए हैं कि प्रशासन को जल आपूर्ति के लिए शहर को अलगअलग हिस्सों में बांटना पड़ा है जहां अलगअलग दिन पानी की सप्लाई की जा रही है.

बढ़ती गर्मी के साथ जल संकट इतना गहरा होता जा रहा है कि लोग पानी की सप्लाई के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और पुलिस को पानी की पहरेदारी तक करनी पड़ रही है.

यहां के प्रतिष्ठित मॉल रोड पर पानी के लिए लोग कतारों में लग रहे हैं.

जल संकट से परेशान लोगों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव तक करने की कोशिश की है.

पर्यटन पर असर

गर्मियों के दिन शिमला में पर्यटन के लिए लिहाज से भी बेहतर माने जाते हैं और देश और दुनिया भर के पर्यटक यहां अच्छा समय बिताने पहुंचते हैं.

ये यहां के स्थानीय  लोगों के लिए कमाई का भी सीज़न होता है.

लेकिन इस बार जल संकट सब पर भारी पड़ गया है.

शहर के सार्वजनिक शौचालयों को भी पानी की कमी के कारण बंद कर दिया गया है.

हालात इतने विकट है कि होटलों को निजी टैंकरों से महंगी दरों पर भी पानी की सप्लाई नहीं मिल पा रही है.

ऐसे में होटल मालिकों ने पर्यटकों से शिमला न आने की अपील की है और बुकिंगें रद्द कर दी हैं.

कई इलाक़ों में कई दिनों से पानी नहीं आया है. हालात से परेशान लोगों ने अपने परिजनों को अन्य इलाक़ों में अपने रिश्तेदारों के घर भी भेज दिया है.

शिमला में पानी की किल्लत की वजह है यहां आपूर्ति करने वाले जल स्रोतों का सूख जाना.

ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती है कि वो सीमित जल उपलब्धता के बीच लोगों को पानी मुहैया करा पाए.

अब सरकार का पूरा ज़ोर बचे हुए जल स्रोतों को बचाने और समझदारी से पानी इस्तेमाल करने पर है.

जल संकट की वजह क्या है?

शिमला में जल संकट के पीछे यहां का इतिहास हैदरअसल शिमला कभी भी हिमाचल के लोगों कान निवास स्थान नहीं रहा था.

मैदान के क्षेत्रों की गर्मी जब यहां शासन कर रहे अंग्रेज़ों के लिए असहयनीय हो गई तब सबसे पहले उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रिटिश इंडिया के अंग्रेज़ अफ़सर हिमाचल के कसौली पहुंचे.  उसके बाद वो शिमला आए.

यहां का वातावरण और मौसम अंग्रेज़ों को इतना भाया को उन्होंने इसे ब्रिटिश इंडिया की ग्रीष्मकालीन राजधानी के तौर पर विकसित करना शुरू कर दिया.

तब यह शहर मात्र पच्चीस हज़ार लोगों के रह सकने के लिए बसाया गया था. उसी हिसाब से पानी और अन्य ज़रूरतों के इंतेज़ाम भी किए गए थे.

लेकिन आज इस शहर की आबादी बढ़कर दो लाख तक पहुंच गई है. लेकिन पानी के स्रोत आज भी वहीं है जो अंग्रेज़ों ने विकसित किए थे.

यहां की मूल आबादी के अलावा हर साल गर्मियों में लाखों पर्यटक भी शिमला पहुंचते हैं.

आज शिमला को प्रतिदिन 45 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी की ज़रूरत है लेकिन शहर के पास कुल सप्लाई 20 मिलियन लीटर ही है. यही जल संकट की मुख्य वजह है.

शिमला में पानी की कमी को दो प्रमुख कारण हैं. एक यहां के पांच जल स्रोतों गुम्मा, गिरी, अश्वनी खड्ड, चुरट और सियोग हैं. इनमें से मुख्य स्रोत अश्वनी खड्ड से सप्लाई दो साल से बंद है. साल 2016 में अश्वनी खड्ड के दूषित पानी की वजह से शहर में पीलिया फैलने से तीस लोगों की मौत हो गई थी.

पानी की किल्लत की दूसरी सबसे बड़ी वजह है इस बार सर्दियों में कम बर्फबारी होना.

यही नहीं शहर में हो रहा अंधाधुंध निर्माण, पानी की लीकेज और नगर निमग की बेहद लचर प्रणाली भी जल संकट को और बढ़ा रही है.

स्रोतः एनडीटीवी, बीबीसी, इंडियन एक्सप्रेस


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