मेरी कहानी

मेरी कहानीः ‘उन भैया से मुझे बात करना पसंद था, उन्होंने ही मेरा रेप कर दिया’

तर्कसंगत

June 3, 2018

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जब मैं चौदह साल की थी तो हमारे किराएदार ने मेरा रेप किया. वो मेरे सबसे पसंदीदा भैया थे और मुझे उनसे बात करना अच्छा लगता था. मेरी ना मुझे कई बार चेताया था लेकिन मुझे हमेशा लगता कि वो कुछ ज़्यादा ही ध्यान दे रही हैं.

लेकिन अब मैं पछताती हूं कि काश मैं उनकी बात सुन लेती.

वो अक्तूब की एक दोपहर थी जब दरवाज़े की घंटी बजी. मैं घर पर अेकली थी. मेरी बहनें और मम्मी-पापा उत्तर प्रदेश में एक शादी में गए हुए थे. स्कूल में टेस्ट होने की वजह से मुझे घर में ही रुकना पड़ा था.

घर को ताला लगाकर छोड़कर जाना भी परिवार को सही नहीं लगा था.

मुझे याद है जब मैंने उन्हें दरवाज़े पर देखा था तो मैं मुस्कुराई थी.

उन्होंने कहा कि क्या मैं उनके लिए एक कप चाय बना सकती हूं. जब मैं किचन की ओर गई तो उन्होंने घर का दरवाज़ा बंद कर दिया.

उन्होंने मेरा हाथ थामा और कहा कि वो मेरे प्रति अपना प्यार ज़ाहिर करने के लिए अब और इंतेज़ार नहीं कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि वो मुझसे शादी करना चाहते हैं. मैं चौंक गई थी. मैंने उन्हें याद दिलाया कि वो मेरे लिए बड़े भाई की तरह हैं. मैं आगे कुछ और कह पाती उन्होंने मुझे जकड़ लिया. मैं उनसे छोड़ देने की गुहार लगाती रही लेकिन उन्होंने मेरा रेप कर दिया. वो मुझे अब इंसान भी नहीं लगते थे. मैंने जब अपने आप को छुड़ाने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे ज़ोर से दो थप्पड़ मारे और रेप का वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी.

उस दिन ने मेरी ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया.

मैं एक हंसमुख लड़की थी. अब मैं अवसाद और दुख में रहने लगी. मुझे अहसास भी नहीं था कि ये तो बस शुरूआत है.

दो दिन बाद जब घरवाले वापस लौटे तो मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया. उन्हें मेरा बर्ताव बदला हुआ लगा लेकिन मैं ये बात उनसे छुपाने में कामयाब रही.

कुछ दिन बाद मैंने स्कूल जाना बंद कर दिया. मेरी सेहत लगातार ख़राब हो रही थी. मेरे पेट में लगातार दर्द हो रहा था लेकिन मैंने कभी ये नहीं सोचा था कि मेरे पेट में एक बच्चा पल रहा है.

जून 2016 की एक रात दो बजे तेज़ पेट दर्द से मेरी आंख खुली. मेरी मां ने मेरे पिता से मुझे तुरंत अस्पताल ले जाने को कहा.

अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि मैं आठ महीने की गर्भवती हूं.

मेरे पिता ने मुझे अस्पताल में ही पीटना शुरू कर दिया. मेरे मां-पिता दोनों बुरी तरह रोने लगे.

वो चाहते थे कि मेरा बच्चा गिरा दिया जाए लेकिन समय बहुत ज़्यादा हो चुका था. मेडिकल बोर्ड ने बच्चा गिराने की अनुमति नहीं दी.

अगले दिन सुबह मैंने आत्महत्या करने का सोचा लेकिन अपने बच्चे के बारे में सोचकर रुक गई.

मैंने अपने परिजनों को बता दिया कि किस तरह भैया ने मेरा रेप किया था. जल्द ही उसे गिरफ़्तार कर लिया गया.

लगभग एक महीने बाद मैंने एक बच्ची को जन्म दिया. वो पांच दिन मेरे पास रही. वो मेरी ज़िंदगी के सबसे अच्छे दिन थे. लेकिन अधिकारी उसे सरकारी देखभाल में रखने के लिए ले गए.

किसी ने मुझे इसके लिए तैयार नहीं किया था.

सामाजकि बहिष्कार और कलंकित होने के डर से मेरे परिजनों ने मुझे बच्ची को अधिकारियों को सौंपने के लिए मजबूर कर दिया. मैं भले ही नाबालिग थी लेकिन मैंने एक बच्ची को जन्म दिया था.

उस बच्ची का क़सूर क्या था? उसे अपनी मां से अलग क्यों रहना पड़े?

उस अपराधी को दस साल की सज़ा सुनाई गई और बीस हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया गया.

लेकिन मेरी क़ैद लंबी चलेगी. मेरे परिजनों ने मुझसे घर और मेरी बहनों से दूर रहने के लिए कह दिया है.

वो कहते हैं कि मैंने उन्हें कलंकित कर दिया है.

ये लड़की अब एक एनजीओ के साथ काम करती है. वो दोबारा स्कूल नहीं लौट सकी. उसकी बेटी को एक परिवार ने गोद ले लिया है.

(जैसा कि उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की लीना धनकर को बताया)


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