ख़बरें

झारखंडः तीन दिनों में भूख से दो महिलाओं की मौत, सरकार ने मांगी रिपोर्ट

तर्कसंगत

June 6, 2018

SHARES

झारखंड में बीते तीन दिनों में भूख से मौत के दो मामले सामने आए हैं.

भूख से मौत के मामलों के सुर्ख़ियां बनने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने जांच के आदेश दे दिए हैं.

स्थानीय मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक मंगलवार को पैंतालीस वर्षीय मीना मुसहर की मौत भूख से हो गई. वो छतरा ज़िले के इकठोरी ब्लॉक के एक गांव की रहने वाली थीं.

मीना के बेटे ने दावा किया है कि उनकी मां की मौत भूख से हुई है. प्रशासन इसकी पुष्टि करने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतेज़ार कर रहा है.

मीना कूड़ा बीनने का काम करती थीं. उनके बेटे गौतम मुसहर ने मीडिया से कहा, ‘बीते तीन-चार दिनों से हमारी कोई आमदनी नहीं हुई थी. मेरी मां चार दिनों से कुछ नहीं खा सकीं थीं. सोमवार को उनकी हालत ख़राब हो गई और मैं उन्हें अपने कंधों पर रखकर अस्पताल लेकर गया. डॉक्टरों ने बताया कि उनकी मौत हो चुकी है.’

ये झारखंड में बीते तीन दिनों में भूख से मौत का दूसरा मामला है. इससे पहले शनिवार को 65 वर्षीय सावित्री की मौत भूख की वजह से हो गई थी.

गीरडीह ज़िले के मंगरगड्डी गांव की रहने वाली सावित्री के परिवार ने भी भूख को ही उनकी मौत की वजह बताया है.

गांववालों का कहना है कि उनके घर में तीन दिनों से खाना नहीं बना था.

सावित्री देवी के पास राशन कार्ड नहीं थी. वो पेंशन पाने के योग्य थीं लेकिन उन्हें कोई पेंशन नहीं दी जा रही थी.

वो अपनी बहु के साथ भीख मांगकर पेट भर रहीं थीं. उनके दोनों बेटों को काम की तलाश में गांव छोड़ना पड़ा है.

झारखंड में इससे पहले भी भूख से मौत के मामले सामने आते रहे हैं लेकिन सरकार इन्हें नकारती रही है.

लेकिन इस बार मुख्यमंत्री रघुबर दास ने इन मौतों का संज्ञान लिया है और अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी हैं.

झारखंड भारत के सबसे पिछड़े प्रांतों में से एक है जहां बड़ी आबादी गांवों में रहती है.

यहां के लोग काम की तलाश में बड़े शहरों और महानगरों में पलायन भी करते हैं.

विकास के तमाम दावों के बावजूद 21वीं सदी में किसी की भूख से मौत हो जाना सिर्फ़ प्रशासन या राजनीतिक व्यवस्था ही नहीं बल्कि हमारे सामाजिक और मानवीय मूल्यों पर भी गंभीर सवाल है.

भारत में इस समय खाद्यान की कमी नहीं है और भारत अपनी खाद्यान ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम है.

सरकार की ओर से पीडीएस प्रणाली के तहत सभी ज़रूरतमंदों को राशन देने की व्यवस्था भी है.

बावजूद इसके भ्रष्टाचार और प्रशासनीक उदासीनता की वजह से बहुत से लोग अपने हक़ों से वंचित रह जाते हैं.

सावित्री देवी भी ऐसे लोगों में से ही एक थीं. वे भारत की नागरिक थीं. लेकिन एक देश के रूप में भारत उनके प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को पूरा नहीं कर सका.

सबसे अफ़सोसनाक़ बात ये है कि सावित्री देवी और मीना मुसहर की मौत के ज़िम्मेदार अधिकारियों को शायद ही सज़ा मिल पाए.


Contributors

Edited by :

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...