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राष्ट्रपति भवन में इस साल नहीं होगी इफ़्तार पार्टी

तर्कसंगत

June 7, 2018

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में कोई भी धार्मिक आयोजन न करने का फ़ैसला लिया है.

इसी के तहत इस साल राष्ट्रपति भवन में इफ़्तार पार्टी नहीं होगी

रमजान के महीने में दुनियाभर के मुसलमान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक अन्न जल का त्याग करते हैं. सूर्यास्त के समय किए जाने वाले भोजन को ही इफ्तार कहा जाता है. रोज़े रखना इस्लाम धर्म के पांच मूल सिद्धांतों में से एक है.

इससे पहले दिवंगत राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के कार्यकाल के दौरान साल 2002 से 2007 के बीच राष्ट्रपति भवन में इफ़्तार पार्टी का आयोजन नहीं किया गया था.

राष्ट्रपति कलाम के कार्यकाल में इफ़्तार पर होने वाले खर्च को गरीबों और अनाथों पर खर्च किया गया था.

हालांकि उनके बाद प्रतिभा पाटिल और प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल के दौरान इफ़्तार पार्टी का आयोजन किया जाता रहा था.

राष्ट्रपति की ओर से दी जाने वाली इफ़्तार पार्टी में देश के शीर्ष नेता, समाजसेवी और धर्मगुरू शामिल होते रहे थे.

राष्ट्रपति कोविंद के मीडिया सचिव अशोक मलिक ने एक बयान जारी कर कहा है, “25 जुलाई, 2017 को रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी. तभी उन्होंने फैसला किया था कि राष्ट्रपति भवन एक सार्वजनिक इमारत है. यहां सरकार या कर दाताओं के पैसों से किसी भी धर्म का कोई भी आयोजन या पर्व नहीं मनाया जाएगा. यह नियम सभी धर्मों के त्योहारों पर लागू होगा. हालांकि वे देशवासियों को हर त्योहार पर शुभकामनाएं देंगे. वैसे राष्ट्रपति भवन परिसर में रहने वाले सभी अफसर और कर्मचारी अपनेअपने त्योहार मनाने के लिए स्वतंत्र हैं. उन पर किसी भी प्रकार की कोई रोक नहीं है.

राष्ट्रपति कोविंद ने बीते साल राष्ट्रपति भवन में होने वाले क्रिसमस कैरोल गायन कार्यक्रम को भी रद्द कर दिया था.

इससे पहले ये कार्यक्रम साल 2008 में प्रतिभा पाटिल के कार्यकाल के दौरान मुंबई हमलों की वजह से रद्द किया गया था.

भारत एक धर्म-निरपेक्ष देश है जहां सभी धर्मों को मानने वालों को बराबर अधिकार हासिल हैं.

सरकार धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकती है और न ही किसी ख़ास धर्म को बढ़ावा दे सकती है.

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