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उप्र : महिला जिसने दहेज़ के लिए खुद के मारेजाने का ढोंग रचा, ज़िंदा पायी गयी और दूसरी शादी भी की

Kumar Vibhanshu

September 1, 2018

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उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की एक महिला, जिसे दहेज के लिए ससुराल वालों द्वारा कथित तौर पर मार दिए जाने का आरोप लगा था, दिल्ली में जिंदा पायी गयी, जहां वह एक और आदमी के साथ रह रही थी। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने फेसबुक पर महिला को ट्रैक किया।

 

पिता ने पति और उसके परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई


टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पुलिस ने कहा कि सफदरगंज निवासी रुबी ने 2016 में राहुल से शादी की। जून 2018 में रूबी के पिता हरिप्रसाद बेटी से मिलने उसके ससुराल आए, हालांकि परिवार ने उन्हें रूबी से मिलने की अनुमति नहीं दी। इससे पिता को संदेह हुआ की दहेज़ के लिए उसकी बेटी को जला दिया गया है। सबसे पहले, जून 2018 में, हरिप्रसाद ने राहुल और उनके परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस से संपर्क किया, लेकिन प्रारंभिक जांच के बाद, पुलिस को यह मामला एफआईआर दर्ज करने के लिए पर्याप्त नहीं मिला। बाद में हरिप्रसाद ने स्थानीय अदालत से संपर्क किया जिसने पुलिस को जुलाई 2018 में मामला दर्ज करने का आदेश दिया।

बाराबंकी पुलिस अधीक्षक, वी पी श्रीवास्तव ने एक  दैनिक अखबार से कहा, “जब रूबी के पिता ने हमसे संपर्क किया और दहेज के लिए अपनी बेटी की हत्या का आरोप दामाद पर लगाया, तो हमने इस मामले की जांच की, लेकिन लाश नहीं मिली। लेकिन अदालत के आदेश पर एफआईआर दर्ज कराने के बाद, हमने फिर से हमारी जांच शुरू की। हमें पता चला कि उसकी फेसबुक आईडी सक्रिय थी, हमने दो महीने तक अपने फेसबुक से उसको ट्रैक किया और उसके फोन को निगरानी पर रखा। “

 

फेसबुक के माध्यम से साइबर सेल ने महिला को ट्रैक किया

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस के साइबर सेल ने दिल्ली में उसका लोकेशन  ट्रैक किया जहां वह रामू नामक व्यक्ति के साथ रह रही थीं। एक पुलिस दल दिल्ली पहुंची और दोनों को गिरफ्तार कर लिया। रुबी ने स्वीकार  किया कि उसने अपनी मौत की झूठी खबर फैलाई और उसके पिता उसकी योजनाओं से अनजान थे।

पुलिस ने राहुल और उसके परिवार के खिलाफ आरोप हटा दिए हैं और अदालत को गुमराह करने के आरोप में पिता पर केस किया है। न्यूज़18 के मुताबिक, एसपी ने कहा, “लड़की को फेसबुक के माध्यम से ढूंढा गया और उसने स्वीकार किया कि वह वही लड़की थी जिसका नाम एफआईआर में दर्ज़ था। उसने पुलिस के साथ सहयोग किया और उन्हें अपनी कहानी सुनाई। हम अदालत और पुलिस को गुमराह करने के लिए धारा 182 के तहत पिता के खिलाफ मामला दर्ज करेंगे। “

तर्कसंगत का पक्ष

यद्यपि दहेज और दहेज से संबंधित उत्पीड़न अभी भी भारत में एक बड़ी सामाजिक समस्या है, लेकिन यह मामला इस बात का एक उदाहरण है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए जो कानून हैं, उन्हें कुछ महिलाओं द्वारा निर्दोष लोगों को परेशान करने और उन्हें फंसाने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। दहेज और घरेलू हिंसा के कई झूठे मामले हैं जो पति या उसके परिवार के खिलाफ या तो पैसा कमाने या उन्हें सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने के लिए दायर किए जाते हैं। कानूनी व्यवस्था को अपनी कमियों पर काम करने की ज़रूरत है ताकि निर्दोष किसी भी अन्याय का शिकार न हो जाएं।

धारा 498 ए के तहत दहेज विरोधी कानून का इस्तेमाल पत्नियों द्वारा पतियों  और उनके रिश्तेदारों को यातना देने के लिए एक हथियार के रूप में किया जा रहा था। जुलाई 2017 में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरोपों की सत्यता का पता लगाए बिना कोई गिरफ्तारी नहीं की जाएगी या ज़बरदस्ती कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने दहेज उत्पीड़न के मामलों की प्रामाणिकता की जांच करने के लिए जिला स्तर पर परिवार कल्याण समितियों की स्थापना का भी निर्देश दिया है।

 


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