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कश्मीर : सौतेली माँ ने अपने बेटों से करवाया बेटी का रेप, घटनाक्रम बताते रो पड़ी पुलिस

Kumar Vibhanshu

September 7, 2018

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4 सितंबर को उत्तरी बारामुल्ला जिले की पुलिस ने खुलासा किया कि जम्मू-कश्मीर में नौ वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार और हत्या का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने बताया कि पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें कथित रूप से गैंगरेप और नाबालिग की हत्या में शामिल होने के लिए उनकी सौतेली मां और सौतेली भाई शामिल हैं। प्रभारी अधिकारी, एसएसपी बारामुल्ला इम्तियाज हुसैन मीर, अपराध की क्रूरता का वर्णन करते हुए रो पड़ते हैं।

 

बारमुल्ला पुलिस अधीक्षक इम्तियाज हुसैन मीर ने स्क्रॉल को बताया कि, 23 अगस्त को, उरी गांव में नाबालिग लड़की अपने घर से गायब हो गई थी, जिसके बाद उसके पिता ने पुलिस के साथ शिकायत दर्ज कराई थी।

 द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पुलिस ने कहा कि   रविवार को, लड़की के विकृत शरीर को पास के वन क्षेत्र में पाया गया था। शुरुआत में, पुलिस ने सोचा कि यह हत्या का मामला है, हालांकि जल्द ही मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) नियुक्त की गयी थी।

पिता की लाड़ली बेटी थी


पुलिस ने आगे कहा कि पीड़िता के पिता, जो दो महिलाओं से शादी कर चुके थे, ज्यादातर समय अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहते थे। उनकी पहली पत्नी, फहमीदा (35) इस बात से खुश नहीं थीं। असल में, उनका मानना ​​था कि उनके पति ने अपनी दूसरी पत्नी को और अधिक पसंद किया था और उनकी 9 वर्षीय बेटी उनके पति की पसंदीदा बच्ची थी। फहमीदा को यह बात नागवाँरा गुज़री।

पुलिस के बयान के मुताबिक, 24 अगस्त को लड़की की सौतेली मां ने उसे जंगल में ले गयी, उसने अपने साथ एक चाकू और उसके 14 वर्षीय बेटे को साथ लिया। अन्य आरोपी उनके बेटे के दोस्त हैं, 19 वर्षीय कैसर अहमद, और 28 वर्षीय नसीर अहमद।

दो  नाबालिग समेत सभी चार पुरुषों ने  सौतेली माँ के ज़ोर देने पर लड़की के साथ निर्दयतापूर्वक बलात्कार किया। पुलिस ने कहा कि जब घटना हुई तो सौतेली मां वहां मौजूद थीं।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में, पुलिस ने कहा, “यह कैसर था जिसने पहली बार उसके साथ बलात्कार किया था और फिर उसके सौतेले भाई समेत अन्य सभी ने लड़की के साथ बारी बारी से बलात्कार किया।” “इसके बाद सौतेली माँ ने लड़की का गला घोंटा और उसके सौतेले भाई ने कुल्हाड़ी के साथ सिर पर बेरहमी से मारा, और उसकी हत्या कर दी”

अपराध के दृश्य को छोड़कर जाते वक्त आरोपी में से एक ने पीड़िता की आंखों को एक तेज चाकू से निकाल लिया और फिर उसके शरीर के अंगों पर एसिड छिड़क दिया। बाद में लड़की के शरीर को झाड़ियों में दो आरोपियों ने फेंक दिया और उन्होंने शाखाओं के साथ इसे कवर किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हत्या रहस्य के जाल में फंसी रहे। पुलिस ने शारीरिक स्थिति और शरीर के प्रारंभिक फोरेंसिक विश्लेषण से इन सभी तथ्यों को पुख्ता किया है।

‘सबसे भयानक मामला’


इंटरनेट पर एक विडीयो वायरल हुआ है जिसमें एसएसपी बारामुल्ला, इम्तियाज हुसैन को मामले की निर्दयता, जाँच के क्रम और तथ्यों के बारे मे प्रेस को बताते समय फूट कर रोते पाया गया।

क्विंट से बात करते हुए उन्होंने कहा, एसएचओ इकबाल अहमद सही रास्ते पर साबित हुए जब उन्होंने कुछ सबूतों के आधार पर हमें गनई की पहली पत्नी फहमीदा से सवाल करने का सुझाव दिया।
जैसे ही हम उसे अपनी हिरासत में ले गए, सौतेली मां ने सारे राज़ खोल दिये और मामले में शामिल दो किशोरों सहित सभी पात्रो अभियुक्तोंं की पहचान की, उसके बाद हमने उन्हें हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ की।

उनके अपराध के कूबूल करने के बाद अपराध में इस्तेमाल हथियारों और सामानों को खोजा और ज़ब्त किया गया। कुल्हाड़ी और चाकू समेत अपराध की सभी सामग्री और हथियार बरामद कर लिए गए हैं।

घटना की पृष्ठभूमि


पिता ने दो महिलाओं के साथ निका़ह किया था एक  स्थानीय गांव की और एक और दूसरी बीवी झारखंड के एक गांव की रहने वाली थी। पहली बीवी से उनके दो बेटे हैं जो 14 और 16 वर्ष के हैं, और एक बेटी भी है।
2008-09 में दूसरी शादी से, लड़की के पिता की बेटियां हैं और एक बेटा था, उनमें से सभी 10 साल से कम उम्र के थे।
पहली पत्नी, फहमीदा जंगल मे मवेशी चराने ले जाया करती थी, दूसरी पत्नी ने खाना पकाने और अन्य घरेलू कामकाज की जिम्मेदारी संभाली थी। सालों से, फेहेमेडा ने महसूस किया कि उसके पति ने अपनी छोटी पत्नी और उसके तीन बच्चों के साथ अधिक प्यार किया और अधिक समय बिताया जो कि उसे पसंद नहीं था।

 

र्तकसंगत का पक्ष

 

यह घटना हमारे इंसान होने के तथ्य पर सवालिया निशान उठा जाती है, क्योंकि इस तरह की घटना धरती पर के किसी भी प्रजाति का कोई हिंसक जानवर भी नहीं करता। ख़ास तौर पर कोई माँ ऐसा विभत्स कार्य करने का सोच भी कैसे सकती है? ईष्या, जलन, आदि भावनाऐं हमारे अन्दर के प्रेम, वात्सल्य, ममता को ख़त्म किए जा रहे हैं, भले ही पीड़िता उसके कोख़ से जन्मी नहीं थी, मगर फहमीदा खुद एक लड़की की माँ भी है।

सरकार तो सख्त से सख्त कानून शायद ले भी आए, मगर उससे ज़्यादा ज़रूरी है कि हम अपने अन्दर पनपने वाली निर्ममता को रोकें, समाज के निचले से निचले स्तर तक महिलाओं के प्रति फैल रही इस तरह की घिनौनी सोच को रोका जाये। संक्षेप में र्तकसंगत की यही गुज़ारिश रहेगी कि हम अपने बेटीयों, महिलाओं को भयरहित, और उनका सम्मान करने वाला समाज दें।

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